- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले के शिक्षाविद एवं समाज सेवक रहे नागेंद्र सिंह नें रानी झांसी के नामांकरण में सरकार के बदलाव पर सवाल उठाते हुये कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसके लिये तर्क भी दिया है। साथ ही रानी की तलवार को ग्वालियर में रखे होने को भी औचित्य हीन बताया है।

शिक्षाविद नागेंद्र सिंह नें रानी झांसी को “वीरांगना रानी झांसी” कहकर “उनके कद को छोटा” कर दिया गया। तर्क दिया की “वीरांगना तो बहुत हुई है” पर रानी झांसी एक ही है। “गजट ईयर में भी रानी झांसी से संबोधित” किया गया है। सरकार को झांसी के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिये। “उनका नाम रानी झांसी” पर्याप्त है। झांसी की पहचान ही “रानी झांसी” से है। झांसी की जनता को इसकी आवाज उठानी चाहिए की अल्प ज्ञान के कारण उनके नाम के साथ छेड़छाड़ न की जाए।

शिक्षाविद नागेंद्र सिंह कहा है की इसके साथ ही इस बात की भी मांग उठानी चाहिए की रानी झांसी की तलवार ग्वालियर मैं क्यों रखी हुई है ? उस पर “झांसी का अधिकार” है। “ग्वालियर नरेश ने यदि उनका साथ दिया होता तो आज इतिहास कुछ और होता”। इस कारण भी उनकी तलवार पर ग्वालियर का अधिकार नहीं है।
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