
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड के माथे पर एक बार फिर ‘सूखे’ का साया ‘मंडराने’ लगा है ! गुरुवार को ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यशाला में पहुंचे प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जब सूखे की विभीषिका की आशंका जताई तो सभागार में बैठे सैकड़ों ‘किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच’ गईं।
कृषि मंत्री ने साफ शब्दों में चेताया कि इस साल प्रदेश में सूखे का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसकी वजह है प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ सुपर एल नीनो, जिसके कारण मानसून बुरी तरह बेअसर हो गया है। आंकड़े भी डरा रहे हैं, अब तक बांदा, हमीरपुर और महोबा क्षेत्र में सामान्य के मुकाबले सिर्फ 35 से 36 प्रतिशत ही बारिश हुई है। मंत्री ने किसानों से सीधे कहा कि ऐसे हालात में ज्यादा पानी पीने वाली धान की फसल बोना आत्मघाती कदम होगा। लागत तो डूबेगी ही, परिवार पर कर्ज का बोझ भी बढ़ जाएगा। उन्होंने किसानों से कम पानी वाली दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की तरफ रुख करने की अपील की।
कार्यशाला में तीनों जिलों के किसानों के साथ कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे। वैज्ञानिकों ने नमी संरक्षण, मेड़बंदी और ड्रिप सिस्टम जैसे उपायों पर जोर दिया, ताकि एक-एक बूंद पानी बचाकर फसल ली जा सके। कृषि मंत्री का संदेश बेहद साफ था की आसमान से राहत की उम्मीद कम है, इसलिए जमीन पर ही सूझबूझ से लड़ाई लड़नी होगी। अगर समय रहते ‘खेती का पैटर्न नहीं बदला तो इस बार सूखा सिर्फ खेत नहीं, किसान की उम्मीदें भी चट’ कर जाएगा। कार्यक्रम को जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद नें भी संबोधित किया।
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