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करोड़ों की 'जल योजना' बेनक़ाब? सूखे नलों ने खोली 'सिस्टम' की पोल, 'प्यासा' तड़प रहा गांव ?
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

करोड़ों की ‘जल योजना’ बेनक़ाब ? सूखे नलों ने खोली ‘सिस्टम’ की पोल, ‘प्यासा’ तड़प रहा गांव ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। सरकार ‘हर घर जल’ का सपना साकार करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन बबेरू क्षेत्र के मुरवल गांव में इस योजना की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। गांव के ऊंचाई वाले हिस्सों में बसे परिवार आज भी एक-एक बूंद पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हालत यह है कि नलों में पानी नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदें सूख चुकी हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा?

करोड़ों की 'जल योजना' बेनक़ाब? सूखे नलों ने खोली 'सिस्टम' की पोल, 'प्यासा' तड़प रहा गांव ?गांव के रामलीला हनुमान मंदिर के आसपास का इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां दर्जनों परिवार कई दिनों तक नल खुलने का इंतजार करते हैं, लेकिन पाइपलाइन से ‘पानी की एक बूंद’ तक नहीं निकलती। मजबूरी में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे दूर-दराज के हैंडपंपों और अन्य स्रोतों से ‘पानी ढोने को विवश’ हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच यह संकट ग्रामीणों के लिए रोज की ‘जंग’ बन चुका है।

करोड़ों की 'जल योजना' बेनक़ाब? सूखे नलों ने खोली 'सिस्टम' की पोल, 'प्यासा' तड़प रहा गांव ?ग्रामीण रामबाबू दुबे बताते हैं कि पानी कभी-कभार ही आता है। कई बार पूरा दिन बीत जाता है, लेकिन नलों से पानी नहीं निकलता। दूसरी ओर श्याम किशोर का आरोप है कि शिकायत करने पर अधिकारी एक-दो दिन के लिए आपूर्ति चालू करा देते हैं, फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। यानी समस्या का समाधान नहीं, केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। ग्रामीण नीरज सिंह का कहना है कि उनकी गली के करीब 20 परिवार महीनों से नियमित जलापूर्ति का इंतजार कर रहे हैं। पाइपलाइन बिछी है, लेकिन पानी नहीं आता। ऐसे में लोगों को पीने, खाना बनाने और दैनिक जरूरतों के लिए दूसरे गांवों या दूर के स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है।

करोड़ों की 'जल योजना' बेनक़ाब? सूखे नलों ने खोली 'सिस्टम' की पोल, 'प्यासा' तड़प रहा गांव ?कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थायी समाधान निकालने के बजाय खानापूर्ति करते रहे। अब लोगों का सब्र जवाब देने लगा है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित जलापूर्ति बहाल नहीं की गई और तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब ‘हर घर जल’ योजना पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, तो मुरवल के लोग आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए क्यों तरस रहे हैं? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर व्यवस्था की गंभीर विफलता ?

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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