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फर्जी 'अफसरों' का आतंक: आरटीओ, एसडीएम व माइंस अफसर बन चला रहे थे 'धन उगाही' का सिंडिकेट'
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फर्जी ‘अफसरों’ का आतंक: आरटीओ, एसडीएम व माइंस अफसर बन चला रहे थे ‘धन उगाही’ का सिंडिकेट’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। सड़क पर वर्दी नहीं थी, लेकिन रौब किसी बड़े सरकारी अधिकारी से कम नहीं। हाथ में फाइल, साथ में लैपटॉप, चार पहिया वाहन और सरकारी कार्रवाई की धमकी। सामने पड़ने वाला हर ई-रिक्शा, ट्रक और अन्य वाहन चालक इनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया था। ये खुद को कभी आरटीओ, कभी माइंस अधिकारी तो कभी एसडीएम बताकर लोगों को डराते, गाड़ियों की फोटो खींचते और चालान व वाहन सीज करने का भय दिखाकर मौके पर ही नकदी वसूल लेते।

फर्जी 'अफसरों' का आतंक: आरटीओ, एसडीएम व माइंस अफसर बन चला रहे थे 'धन उगाही' का सिंडिकेट'लेकिन शुक्रवार को बांदा पुलिस ने इस कथित फर्जी अफसर गिरोह के खेल पर “बड़ा ब्रेक” लगा दिया। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कोतवाली नगर क्षेत्र में गश्त कर रही पुलिस टीम के पास एक ई-रिक्शा चालक पहुंचा। उसने बताया कि कुछ लोग चार पहिया वाहन में घूमकर खुद को सरकारी अधिकारी बता रहे हैं और चालकों से जबरन रुपये वसूल रहे हैं।

फर्जी 'अफसरों' का आतंक: आरटीओ, एसडीएम व माइंस अफसर बन चला रहे थे 'धन उगाही' का सिंडिकेट'सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मवई बाईपास पर घेराबंदी कर चारों संदिग्धों को पकड़ लिया। पूछताछ शुरू हुई तो “जो कहानी सामने आई, उसने पुलिस को भी चौंका” दिया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे अलग-अलग जिलों में जाकर सुनसान और कम भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर वाहनों को रोकते थे। पहले खुद को आरटीओ, एसडीएम या माइंस विभाग का अधिकारी बताते, फिर मोबाइल से वाहन की तस्वीरें खींचकर चालक को चालान, वाहन सीज करने और कानूनी कार्रवाई का “डर” दिखाते।

फर्जी 'अफसरों' का आतंक: आरटीओ, एसडीएम व माइंस अफसर बन चला रहे थे 'धन उगाही' का सिंडिकेट'पुलिस का कहना है कि इस तरह वसूली गई रकम चारों आरोपी आपस में बांट लेते थे। आरोपियों के कब्जे से 5,400 नकद, चार पहिया वाहन, एक लैपटॉप, चार मोबाइल फोन तथा विभिन्न दस्तावेजों से भरी एक फाइल बरामद की है। गिरफ्तार आरोपियों में सौरभ निवासी रीवा (मध्य प्रदेश) तथा कमल, राजकुमार और संतोष कुमार निवासी चित्रकूट शामिल हैं। पुलिस अब इनके आपराधिक इतिहास के साथ-साथ यह भी खंगाल रही है कि क्या इस गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं और किन-किन जिलों में इन्होंने इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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