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मवई बुजुर्ग में 'सिसक' रही जिंदगी: दर्द भरी 'जुबां' आखिर कौन सुनेगा !
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मवई बुजुर्ग में ‘सिसक’ रही जिंदगी: दर्द भरी ‘जुबां’ आखिर कौन सुनेगा !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। शहर की चमचमाती लाइटें जहां खत्म होती हैं, वहीं से शुरू होता है मवई बुजुर्ग का अंधेरा। बांदा शहर से सटा यह गांव विकास के नक्शे से ऐसा कटा कि यहां की सड़कें अब नक्शे में नहीं, लोगों के जख्मों में दर्ज हैं। सुबह 7 बजे। मवई बुजुर्ग के बच्चे बस्ता टांगकर घर से निकलते हैं। मंजिल मेन रोड पर स्कूल, लेकिन रास्ता गौशाला वाली आरसीसी रोड। नाम आरसीसी, काम कीचड़। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उनमें भरा बरसाती पानी और ऊपर से उड़ती मिट्टी। स्कूल पहुंचने तक यूनिफॉर्म पर कीचड़ के छींटे किसी तमगे से कम नहीं लगते। एक बच्चा फिसलता है तो चार दोस्त हंसी में दर्द छुपा लेते हैं क्योंकि रोने से गड्ढे भरते नहीं।

मवई बुजुर्ग में 'सिसक' रही जिंदगी: दर्द भरी 'जुबां' आखिर कौन सुनेगा ! बुजुर्ग महेश सिंह खाट पर बैठे-बैठे गांव का हाल सुनाते हैं, “हर जुबां पर यही है कि जाएं तो जाएं कहां, समझेगा कौन यहां दर्द भरे दिल की जुबां।” उनकी बात में शिकायत कम, थकान ज्यादा है। कहते हैं, “शहर इतने पास है कि रात की रोशनी दिखती है,पर हमारे हिस्से का उजाला कभी नहीं आया।” गांव में घुसते ही नाक बंद करनी पड़ती है। नालियां बजबजाती हैं, कूड़े के ढेर से मक्खियां भिनभिनाती हैं। सफाई कर्मचारी का चेहरा यहां किसी ने सालों से नहीं देखा। महिलाएं बताती हैं कि प्रधान से लेकर डीएम तक अर्जियां दीं। फाइलें बढ़ीं, उम्मीदें घटीं। दफ्तरों में पड़ी अर्जियों पर अब धूल की परत इतनी मोटी है कि कलम फिसल जाए।

अठ्ठाइस करोड़ में बिक गई "स्वच्छता": गांवों में सड़ांध और फाइलों में सफाई !जिम्मेदार बेखबर !ग्रामीणों का सीधा आरोप है की “जनप्रतिनिधि अपने वोट बैंक वाले मोहल्ले चमकाते हैं। मवई बुजुर्ग न वोट बैंक है,न फोटो खिंचाने की जगह। इसलिए तिरस्कृत है।” गौशाला वाली सड़क गांव की लाइफलाइन है। वही टूटी तो गांव शहर से टूट गया। एंबुलेंस नहीं आती, बारात नहीं आती, आती है तो मजबूरी वश। गांव के नौजवानों ने तय किया है कि अब फरियाद नहीं, संघर्ष होगा। पंचायत में फैसला हुआ “सड़क नहीं बनी तो मेन रोड पर अनशन करेंगे।” मवई बुजुर्ग सवाल नहीं कर रहा, आईना दिखा रहा है। शहर से सटा गांव अगर आज भी गड्ढों में है, तो विकास की तस्वीर में दरार साफ दिखती है। प्रश्न सिर्फ सड़क का नहीं, भरोसे का है। और भरोसा टूटे तो गांव सड़क पर उतरता है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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