- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड की प्रमुख नदियों में शामिल जिले के जसपुरा क्षेत्र में चंद्रायल की जलधारा को रोकर मौरंग कारोबारियों ने अवैध पुल बना डाला। किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगी। कारोबारी मौरंग का खनन व निकासी धड़ल्ले से कर रहे हैं। प्रशासन मामले से अंजान बना है। एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। जलीय जीव मर रहे हैं।

चंद्रायल नदी में बने रपटे से हटकर परिवहन करने के लिए बनाए गए अवैध पुल व नदी की जलधारा को प्रभावित करने से जलीय पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। जिसके चलते आलोना पंप कैनाल ठप पड़ा है। केन नदी के तटवर्ती हिस्सों में जल संकट बढ़ा रहा है। पड़ोहरा में बालू खनन से चंद्रायल व केन नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी की जलधारा पर किए जा रहे नियंत्रण के कारण नदी सूखने की कगार पर है। स्थिति यह है कि लीज सीमा को धता बताते हुए नदी की धारा को कई जगहों पर रोककर ट्रकों को बीच नदी में ले जाने के लिए अस्थाई पुल बनाया गया है।

बालू खदान चंद्रायल नदी के पश्चिमी तट के पास है लेकिन वर्तमान में खादान सीमा से काफी दूर नदी के पूर्वी तट तक नदी के बीच में खनन किया जा रहा है। मामले से लेखपाल, बीट सिपाही से लेकर उच्चाधिकारी तक अंजान बने हैं। कहा जा रहा है जिस दिन से यह कार्य शुरू हुआ प्रतिदिन की वीडियो रिकार्डिंग देखी जा रही है। आधा दर्जन मशीनों से नदी की धारा को बंद करने का कार्य किया गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के स्पष्ट निर्देश और एनजीटी के सख्त हिदायत के बावजूद लगातार चंद्रायल नदी की अविरलता को प्रभावित किया गया है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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