- विनोद मिश्रा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजे आते ही अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद को कब्जाने की जोड़-तोड़ तेज हो गई है. जिला पंचायत सदस्यों के जरिए जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जिला पंचायत सदस्य अपने दल को लेकर कितने आस्थावान है ? इसकी परीक्षा भी होगी। साथ ही राजनीतिक दलों के सामने अपने समर्थक जिला पंचायत सदस्यों को भटकने से रोकने की भी चुनौती होगी। हर जिले में निर्दलीय बड़ी संख्या में जीत कर जिला पंचायत के सदन में पहुंचे हैं। यह चुनाव पार्टी के सिंबल पर भी नहीं लड़ा जाता है ऐसे में यहां पर दलबदल कानून लागू नहीं होता। इसी कमजोरी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जोड़-तोड़ की पृष्ठभूमि बना दी है। ऐसे में सभी पार्टियों के लिए अपने दलीय खेमे को बचाए रखने की बड़ी चुनौती आ पड़ी है।

उत्तर प्रदेश में 75 जिला पंचायत अध्यक्ष तथा 826 ब्लॉक प्रमुखों का चुनाव हुआ है। कुल निर्वाचित 3,051 जिला पंचायत सदस्यों में से भारतीय जनता पार्टी व समाजवादी पार्टी लगभग बराबरी की संख्या पर दिख रहे है परंतु निर्दल सदस्यों की संख्या अधिक है। जिला पंचायत सदस्य की 40 फीसद से अधिक सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली है। सपा नेतृत्व दावा कर रहा है कि सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्य साइकिल के साथ हैं। सपा नेताओ का दावा है कि तीन दर्जन से अधिक जिला पंचायतों में सपा का पलड़ा भारी है।

दूसरी ओर, भाजपा नेतृत्व ने समाजवादी दावे को खारिज करते हुए कहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख चुनाव में पता चलेगा कि कौन किस पर भारी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जीत कई सारे निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व भाजपा कार्यकर्ता हैं जो बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर आए हैं। भारतीय जनता पार्टी ही नहीं समाजवादी पार्टी में भी विजयी बागियों की संख्या अच्छी खासी है। सपा और भाजपा ने निर्दलीय सदस्यों का समर्थन जुटाने को स्थानीय नेताओं को लगाया है वहीं बागियों को मनाने में बड़े नेता भी जुट गए है। “अतीत पर नजर डालें तो जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सत्तारूढ़ दल का ही दबदबा रहा है। जिस दल की सरकार रही है उसी दल ने बड़ी संख्या में जिला पंचायत अध्यक्ष जिताए हैं।” करीब दो दशक बाद भाजपा के सत्तारूढ़ रहते हुए पंचायत चुनाव हो रहे हैं। लेकिन आठ महीने बाद यूपी में वर्ष 2022 के विधानसभा की आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य हवा का रुख देखकर ही सपा और भाजपा को समर्थन देने का निर्णय ले सकते हैं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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