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बंदरों के आतंक पर प्रशासन ने 'टेके' घुटने: पकड़ने के नाम पर 50 हजार का 'फरमान'!
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बंदरों के आतंक पर प्रशासन ने ‘टेके’ घुटने: पकड़ने के नाम पर 50 हजार का ‘फरमान’ !

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। इन दिनों “बंदरों का आतंक किसी प्राकृतिक समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लाचारी की बड़ी कहानी” बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि गांवों और कस्बों में लोग “बंदरों के हमलों से घायल” हो रहे हैं, बच्चे “घरों से निकलने में डर” रहे हैं, महिलाएं छतों पर कपड़े सुखाने से घबरा रही हैं और बुजुर्ग दरवाजे पर बैठने से कतरा रहे हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि आखिर इन बंदरों से लोगों को कौन बचाए, क्योंकि जिम्मेदार विभागों के पास न संसाधन हैं,न प्रशिक्षित टीम और न कोई ठोस व्यवस्था

बंदरों के आतंक पर प्रशासन ने 'टेके' घुटने: पकड़ने के नाम पर 50 हजार का 'फरमान'! तिंदवारी के जसईपुर गांव में हाल ही में बंदरों ने आधा दर्जन लोगों को घायल कर दिया। छापर, खप्टिहा, पलरा, बड़ोखर बुजुर्ग, मनीपुर, निवादा, पैगंबरपुर, पैलानी समेत दर्जनों गांवों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। रेलवे स्टेशन से लेकर शहर के कटरा, पद्माकर चौराहा और डिग्गी चौराहा तक लोग बंदरों के डर में जी रहे हैं। छतों पर रखा सामान, रसोई की चीजें और बच्चों के हाथों का खाना तक सुरक्षित नहीं है।

बंदरों के आतंक पर प्रशासन ने 'टेके' घुटने: पकड़ने के नाम पर 50 हजार का 'फरमान'! चौंकाने वाली बात यह है कि यदि किसी गांव को बंदरों से निजात चाहिए तो पहले मोटी रकम का इंतजाम करना होगा। मथुरा या आगरा से आने वाली टीम एक बार में करीब 50 से 60 हजार रुपये तक का खर्च मांगती है। पहले 25 हजार रुपये एडवांस जमा करवाए जाते हैं। इसके बाद हर बंदर पकड़ने का अलग शुल्क और उन्हें दूसरी जगह छोड़ने का खर्च भी ग्रामीणों को ही उठाना पड़ता है। यानी बंदरों का आतंक झेल रही गरीब जनता अब सुरक्षा के लिए भी चंदा करने को मजबूर है।

बंदरों के आतंक पर प्रशासन ने 'टेके' घुटने: पकड़ने के नाम पर 50 हजार का 'फरमान'! जसईपुर गांव के ग्रामीणों ने “चंदा इकट्ठा” कर मथुरा से टीम बुलाई थी। लेकिन पांच दिन तक अभियान चलने के बाद भी टीम केवल दो बंदर ही पकड़ सकी। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। उनका कहना है कि जब लाखों की आबादी वाले जिले में कोई स्थायी व्यवस्था ही नहीं है तो आखिर लोग अपनी सुरक्षा किसके भरोसे करें? पहले लोग बंदरों की शिकायत वन विभाग से करते थे, लेकिन अब बंदरों को वन्यजीव श्रेणी से हटाए जाने के बाद विभाग भी हाथ खड़े किये है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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