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October 14, 2026
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सिंचाई विभाग की सख्ती 'फुस्स': पंद्रह माह बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, क्यों 'चुप' है सिस्टम ?
उत्तर प्रदेश

सिंचाई विभाग की सख्ती ‘फुस्स’: पंद्रह माह बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, क्यों ‘चुप’ है सिस्टम ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। शहर में “सरकारी सिस्टम” की “पोल खोलती” एक “ऐसी तस्वीर” सामने आई है, जिसने “प्रशासन की साख” पर “गंभीर सवाल” खड़े कर दिए हैं ! “नवाब टैंक को केन नदी” से जोड़ने वाले “ऐतिहासिक निम्नी नाले” पर “कब्जों को हटाने” के लिए “सिंचाई विभाग” ने जो “सख्ती” दिखाई थी, वह अब “पूरी तरह खोखली” साबित हो रही है। करीब 15 महीने पहले दिए गए “नोटिस और ध्वस्तीकरण” की “धमकी आज मजाक” बनकर रह गई है। नाले पर अवैध कब्जे “जस के तस” हैं और विभाग की कार्रवाई फाइलों में कैद होकर रह गई है।

सिंचाई विभाग की चेतावनी धराशाई: नहीं हुई ध्वस्तीकरण की कार्यवाई

सिंचाई विभाग ने “बड़े-बड़े” दावे किए थे “अवैध कब्जे तुरंत” हटाओ, वरना “बुलडोजर” चलेगा। लेकिन “हकीकत” यह है कि “बुलडोजर तो दूर, विभाग का कोई अधिकारी दोबारा मौके पर झांकने” तक नहीं पहुंचा। आज “हालात” यह हैं कि “कब्जाधारियों के हौसले बुलंद” हैं और “विभाग” की चेतावनी “गीदड़ भभकी” बनकर रह गई है। राम निवास मंदिर से मर्दननाका पुलिया तक फैले निम्नी नाले का अस्तित्व ही खतरे में है। जहां कभी पानी का प्राकृतिक बहाव होता था,वहां अब पक्के मकान खड़े हैं। यू-आकार वाले नाले को सीधा कर दिया गया है “यानी प्रकृति के साथ सीधा खिलवाड़”। इसका खामियाजा आने वाले समय में पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है।

सिंचाई विभाग की चेतावनी धराशाई: नहीं हुई ध्वस्तीकरण की कार्यवाई

जब नोटिस जारी हुए थे, तब लोगों में खौफ था ‘घर टूटने’ का डर, उजड़ने की आशंका। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और कोई कार्रवाई नहीं हुई, डर खत्म हो गया।अब हालात ऐसे हैं कि कब्जाधारी खुलकर प्रशासन को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। आखिर 15 महीने बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं ? क्या विभाग पर किसी का दबाव है? क्या नोटिस सिर्फ दिखावे के लिए जारी किए गए थे ? या फिर प्रशासन ने खुद ही घुटने टेक दिए? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं। यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का आईना बन चुका है। कागजों में सख्ती दिखाने वाला सिस्टम जमीनी हकीकत में पूरी तरह फेल है ! निम्नी नाले का मामला अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा यह सिस्टम की साख, प्रशासन की ताकत और कानून के डर की असली परीक्षा बन चुका है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि कानून नहीं, बल्कि कब्जाधारियों की ही चलती है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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