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माफिया रवि काना की रिहाई या रिहायशी सौदा: जेल प्रशासन की 'दलील' पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश

माफिया रवि काना की रिहाई या रिहायशी सौदा: जेल प्रशासन की ‘दलील’ पर उठे सवाल

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। नोएडा के ‘कुख्यात स्क्रैप माफिया और गैंग्स्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना’ की रिहाई ने ‘यूपी की जेल व्यवस्था को कठघरे’ में खड़ा कर दिया है। जिस ‘अपराधी पर रंगदारी’ जैसे गंभीर मुकदमे चल रहे हों, उसकी जेल से “सामान्य प्रक्रिया” में रिहाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है क्या जेल प्रशासन कानून चला रहा था या माफिया ?

स्टील एवं स्क्रैप माफिया रवि काना बांदा जेल में शिफ्ट:दो सौ करोड़ की संपत्ति हो चुकी है जब्त

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब बांदा मंडल कारागार के अफसरों ने गौतमबुद्ध नगर के सीजेएम न्यायालय में दो पन्नों का ऑनलाइन स्पष्टीकरण भेजा है। इसमें दावा किया गया है कि रवि काना के खिलाफ केवल बी-वारंट था,जिसके तहत 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी कराई गई। चूंकि न्यायालय से कस्टडी वारंट या रिहाई रोकने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला, इसलिए उसे अन्य बंदियों की तरह छोड़ दिया गया।

माफिया रवि काना की रिहाई या रिहायशी सौदा: जेल प्रशासन की 'दलील' पर उठे सवाल

लेकिन सवाल यह है कि क्या एक गैंग्स्टर को छोड़ने से पहले इतनी “जल्दबाजी” भी सिस्टम का हिस्सा है ? इसी कथित लापरवाही ने जेल प्रशासन की नींव हिला दी है। डीजी कारागार के निर्देश पर तत्कालीन जेल अधीक्षक, जेलर और डिप्टी जेलर तीनों को निलंबित कर दिया गया है और इनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। प्रयागराज जोन से भेजी गई जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह केवल चूक नहीं, बल्कि मिलीभगत का मामला है।

स्टील एवं स्क्रैप माफिया रवि काना बांदा जेल में शिफ्ट:दो सौ करोड़ की संपत्ति हो चुकी है जब्त

नए जेलर आलोक कुमार ने सीजेएम कोर्ट को भेजी गई आख्या में खुद को इस पूरे प्रकरण से अलग बताते हुए कहा है कि उन्होंने निलंबन के बाद कार्यभार संभाला है और फिलहाल कार्यवाहक जेल अधीक्षक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। रिपोर्ट में निलंबित अफसरों के बयान भी संलग्न किए गए हैं मानो पूरा तंत्र खुद को बचाने की कवायद में जुट गया हो। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा निवासी रवि काना को अगस्त 2024 में गौतमबुद्ध नगर जेल से बांदा मंडल कारागार लाया गया था। इसके बावजूद 29 जनवरी की शाम ठीक 6:39 बजे उसकी रिहाई कर दी गई, जबकि उसी समय रंगदारी का मामला न्यायालय में विचाराधीन था। यही वह बिंदु है, जिसने सीजेएम कोर्ट को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर किया।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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