
- शरद मिश्रा
बांदा। सत्तर हजार ग्रामीण ‘चंद्रावल की कैद’ में ‘सिसक’ रहे हैं ! नदी में पड़ोहरा का रपटा पुल अब सिर्फ एक ‘क्षतिग्रस्त पुल’ नहीं, बल्कि आसपास के 30 मजरों की करीब 70 हजार आबादी के लिए ‘बड़ी मुसीबत’ बन गया है। पुल का पिलर धंसने और ऊपर दरार पड़ने के बाद प्रशासन ने यहां ‘आवागमन पूरी तरह रोक’ दिया है। जिस रास्ते से रोजाना ग्रामीण बांदा और हमीरपुर तक पहुंचते थे, वह ‘रास्ता अब बंद’ हो चुका है। अब ‘नाव सहारा’ है। सड़क से जाने वालों को ‘करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़’ रहा है।
पुल पर खतरे को देखते हुए ‘प्रशासन ने भारी वाहनों के साथ दोपहिया वाहनों का आवागमन भी बंद’ कर दिया है। दोनों ओर लोक निर्माण विभाग ने ईंट की दीवार खड़ी कर दी है, ताकि कोई भी व्यक्ति जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुल पार न कर सके। नांदादेव और पड़ोहरा के बीच चंद्रावल नदी पर बने इस ‘रपटा पुल के क्षतिग्रस्त’ होने का पता 10 अगस्त को चला। सूचना पर राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। ‘पुल का पिलर धंसने और पुल के ऊपर दरार’ पड़ने की पुष्टि हुई।
खतरे को देखते हुए ‘प्रशासन ने तत्काल पुल से आवागमन रोक’ दिया। पुल बंद होते ही आसपास के गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ गया। अमारा, कुटी डेरा, बरेहटा, रामपुर, मड़ौली समेत करीब 30 मजरों की लगभग 70 हजार आबादी की ‘आवाजाही प्रभावित’ हो गई है। जो सफर पहले सीधे रास्ते से होता था,उसके लिए अब करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। प्रशासन ने क्षतिग्रस्त पुल को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। पुल के दोनों ओर पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात हैं। लेकिन इसके साथ ही 70 हजार की आबादी के सामने स्थायी \आवागमन का संकट खड़ा’ हो गया है।
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