City News Uttar Pradesh
बी-वारंट 'कुचलकर' जेल से 'निकला' माफिया रवि काना: जेलर निलंबित, अधीक्षक तलब !
उत्तर प्रदेश

बी-वारंट ‘कुचलकर’ जेल से ‘निकला’ माफिया रवि काना: जेलर निलंबित, अधीक्षक तलब !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। कानून, अदालत और जेल प्रशासन ‘तीनों को ठेंगा’ दिखाकर कुख्यात स्क्रैप माफिया रविन्द्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना मंडल कारागार से रिहा होते ही रहस्यमय ढंग से गायब हो गया। उगाही के संगीन मामलों में नोएडा की अदालत द्वारा जारी बी-वारंट नजरअंदाज कर दी गई। यह रिहाई अब देशभर में न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस आरोपी को “हर हाल में अदालत में पेश करने” का स्पष्ट आदेश था, उसे जेल प्रशासन ने ऐसे छोड़ा जैसे कोई मामूली कैदी हो। अब उसकी फरारी की आंच सीधे सिस्टम तक पहुंच चुकी है।

स्टील एवं स्क्रैप माफिया रवि काना बांदा जेल में शिफ्ट:दो सौ करोड़ की संपत्ति हो चुकी है जब्त

गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-63 थाने में जनवरी 2025 में दर्ज उगाही के मामले में रवि काना के खिलाफ बी-वारंट जारी हुआ था। बी-वारंट का सीधा-सा अर्थ होता है आरोपी को किसी भी सूरत में अदालत के सामने पेश किया जाए। न्यायालय की अनुमति के बिना रिहाई नहीं हो सकती। इसके बावजूद, जब आरोपी पहले से ही बांदा जेल में बंद था, तब भी जेल प्रशासन ने उसे बाहर जाने दिया। सवाल यह नहीं कि आरोपी कैसे छूटा ‘सवाल यह है कि उसे किसने छोड़ा’ ?

स्टील एवं स्क्रैप माफिया रवि काना बांदा जेल में शिफ्ट:दो सौ करोड़ की संपत्ति हो चुकी है जब्त

अदालत ने अपने तीखे आदेश में साफ लिखा है कि जब आरोपी की रिमांड प्रक्रिया चल रही थी और न्यायालय से कोई स्पष्ट रिहाई आदेश नहीं आया था, उस समय जेल से छोड़ा जाना गंभीर प्रशासनिक चूक ही नहीं, बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत ने यहां तक कह दिया कि “क्यों न अभियुक्त को हिरासत से भगाने का मुकदमा जेल अधिकारियों पर चलाया जाए ?” मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने जेलर विक्रम सिंह यादव को तत्काल निलंबित,बांदा जेल अधीक्षक से 6 फरवरी तक शपथपत्र तलब और जेल प्रशासन की भूमिका को “अक्षम्य लापरवाही” करार दिया।

बी-वारंट 'कुचलकर' जेल से 'निकला' माफिया रवि काना: जेलर निलंबित, अधीक्षक तलब !

जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने सफाई देते हुए कहा कि रवि काना पर पॉक्सो, गैंगस्टर एक्ट समेत करीब 20 मुकदमे थे, जिनमें उसे रिहाई मिल चुकी थी। अंतिम रिहाई आदेश 28 जनवरी की सुबह प्राप्त हुआ। उनका दावा है कि बी-वारंट आने पर आरोपी को 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में पेश किया गया। अदालत ने कस्टडी को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए। ऐसे में शाम 6:39 बजे रिहाई कर दी गई। लेकिन बड़ा सवाल यही है जब रात पौने आठ बजे कस्टडी वारंट आ गया, तब तक अपराधी सिस्टम से बाहर क्यों निकल चुका था ? जेल प्रशासन का तर्क है कि अगर आरोपी को रोका जाता तो वह हाईकोर्ट चला जाता। रवि काना के रिहा होते ही गायब हो जाने से पुलिस और प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

ब्यूटी पार्लर बना विस्फोटक गोदाम: पुलिस की छापेमारी में डेढ़ कुंतल अवैध पटाखे बरामद

City News Uttar Pradesh

विधायक प्रकाश बन गये विकास पुंज: सड़क चौड़ीकरण परियोजना का किया भूमि पूजन

सदर विधायक नें स्टेडियम के प्रति जताई चिंता : स्टेडियम के कार्यों पर भी साधा निशाना

डीएम जे रीभा के चकबंदी का पढ़ाया पाठ: कुशलता से निपटारे पर जोर

City News Uttar Pradesh

Banda : दहशत से नहीं उबर पा रही है , दुराचार से पीड़ित बच्ची …

युवक की संदिग्ध मौत: फांसी पर झूलता मिला शव, बहन की चीख ने जगाया सन्नाटा

ब्रेकिंग न्यूज़