
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल की कुर्सी भ्रष्टाचार के आरोपों की आंच में निरंतर झुलसती नज़र आ रही है ! वह रुके टेंडरों को गैर वैधानिक तरीके से पास कराने के लिये गाईड लाईन के विपरीत मचल रहें हैं ? इसी क्रम में वह 18 करोड़ 37 लाख की टेंडर प्रक्रिया को ज़ोर-जबरदस्ती आगे बढ़वाने के लिए एक सुनियोजित और कूट रचित चाल चल बैठे हैं?

बीते सप्ताह सुनील पटेल ने आयुक्त अजीत कुमार से कुछ डीडीसी समर्थकों के साथ मुलाकात की। टेंडरों की बहाली के लिए “गिड़गिड़ाते हुए गोहारनामा” पेश किया ! इस प्रत्यावेदन में दावा किया गया कि 18 करोड़ 37 लाख रुपये के टेंडर पूर्व में जारी किए गए थे, लेकिन कुछ सदस्यों द्वारा भ्रामक शिकायतों और निराधार तथ्यों के आधार पर उसको रोकवा दिया।

आयुक्त ने मामले को सुना। “जांच का पाठ पढ़ाया” और फिलहाल फाइल को “दाखिल-दफ्तर” कर दिया ! असल में शासन अब सुनील पटेल के कथित भ्रष्ट खेल को पहचान चुका है ? जिला पंचायत अधिनियम स्पष्ट रूप से यह कहता है कि यदि कोई अध्यक्ष शासन से वित्तीय अनियमितता की जांच में दोषी पाया गया है, और शासन स्तर पर कार्यवाई लंबित है, तो वह किसी भी प्रकार का नया टेंडर जारी नहीं कर सकता ! बावजूद इसके, सुनील पटेल कथित रूप से इन नियमों को ताक पर रखकर टेंडरों को प्रकाशित करने का खेल रच रहे हैं ! यह सिर्फ प्रशासनिक विद्रोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सीधी अवहेलना है ?

पिछले महीने एक और हास्यास्पद नज़ारा पंचायत सभागार में देखने को मिला, जब सुनील पटेल अपने डीडीसी समर्थकों के साथ मीडिया के सामने आए और समर्थकों ने हाथ उठाकर प्रतिज्ञा किया कि यदि टेंडर पास नहीं हुए तो वे एक सप्ताह के भीतर सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे ! परन्तु “जोश में होश खो बैठी” यह घोषणा अब “पानी के बुलबुले जैसी फुस्स” हो चुकी है ! न कोई इस्तीफा आया, न कोई नैतिक जवाबदेही। उल्टा, “जनमानस के बीच किरकिरी और अविश्वास का माहौल गहरा” गया है।

सुनील पटेल पर खनिज तहबाजारी और अन्य विभागीय मामलों में शासन की जांच रिपोर्ट में उन्हें 6 करोड़ 21 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का दोषी ठहराया गया है। शासन ने उन्हें स्पष्टीकरण के लिए 15 दिन की अंतिम मोहलत और चेतावनी दी है, कि समय पर जवाब न देने की स्थिति में एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह सीधा संकेत है कि “शासन की तलवार अब सुनील पटेल के सिर पर लटक” चुकी है। सूत्रों की यदि सही मानें तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद की गरिमा पर कथित रूप जिस तरह से भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े का दाग लगा है, उससे सुनील पटेल की साख लगभग खत्म सी मानी जा रही है ? अब निगाहें शासन की अंतिम कार्रवाई पर टिकी हैं !
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