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बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर न पुलिस चौकी, न सुरक्षा व्यवस्था: वादे अधूरे, कटघरे में सरकार !
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बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर न पुलिस चौकी, न सुरक्षा व्यवस्था: वादे अधूरे, कटघरे में सरकार !

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे नाम विकास का, लेकिन हकीकत में बना है यह ‘असुरक्षा का गलियारा’। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित इस एक्सप्रेस-वे को दो साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां एक भी पुलिस चौकी नहीं बन सकी। नतीजा ये है कि हर हफ्ते हादसे होते हैं, लोग तड़पते हैं, और मदद समय पर नहीं पहुंचती। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र को जोड़ने वाला ‘सपनों का हाईवे’ कहा गया था, लेकिन आज यह सवालों के घेरे में है “सपनों के इस रास्ते पर मौत क्यों मंडरा रही है ?”

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर न पुलिस चौकी, न सुरक्षा व्यवस्था: वादे अधूरे, कटघरे में सरकार !

इस हाईवे पर अक्सर ऐसे हादसे होते हैं, जहां घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती। पुलिस की गैर मौजूदगी के कारण दुर्घटनास्थल पर भीड़ तो जुटती है, लेकिन न फर्स्ट एड, न रेस्क्यू टीम, और न ही कोई जिम्मेदार अफसर मौजूद होता है। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों की मानें तो “कई बार लोग सड़क पर पड़े-पड़े दम तोड़ देते हैं, क्योंकि एक्सप्रेस-वे पर न तो कोई पुलिस चौकी है, न चिकित्सा सुविधा।”

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जब प्रधानमंत्री ने इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था, उस समय वादा किया गया था कि हर 25 किमी पर पुलिस चौकी बनाई जाएगी। अधिकारियों ने कहा था कि इस रूट को पूरी तरह सुरक्षित और हाईटेक बनाया जाएगा। लेकिन आज दो साल बाद भी चौकियों के नाम पर सिर्फ शून्य है। ना तो बजट की कमी है, ना ज़मीन की सिर्फ इच्छाशक्ति और जवाबदेही का संकट है।

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बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के कई हिस्से पूरी तरह सुनसान हैं। दिन में भी राहगीरों को डर लगता है। महिलाओं के लिए यह रास्ता तो और भी खौफनाक है। ना लाइटिंग है, ना पेट्रोलिंग। यदि गाड़ी खराब हो जाए या कोई आपात स्थिति आ जाए, तो कोई नहीं होता मदद को। बुंदेलखंड के लोग अब पूछ रहे हैं “जब नेता फोटो खिंचवा कर चले जाते हैं, तो पीछे से सुरक्षा क्यों छूट जाती है ? “क्या हम सिर्फ उद्घाटन के लिए हैं, सुविधाओं के लिए नहीं ? कितनी और जानें जाएंगी, तब बनेगी पुलिस चौकी ?” चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों ने आंखें मूंद रखी हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 

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