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August 27, 2026
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भाजपा-संघ की महाबैठक: यूपी पंचायत से विधानसभा तक चुनावी जंग का 'खाका' होगा तैयार
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भाजपा-संघ की महाबैठक: यूपी पंचायत से विधानसभा तक चुनावी जंग का ‘खाका’ होगा तैयार

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान अचानक और तेज़ हो गया है। पंचायत चुनाव, विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने संयुक्त मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित संघ कार्यालय में रविवार को होने वाली महासमन्वय बैठक को इसी लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा इस समय दोहरी चुनौती से घिरी हुई है पंचायत और एमएलसी चुनावों में बढ़त बनाए रखना। समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा–दलित–अल्पसंख्यक) फार्मूले को ध्वस्त करना। लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद भाजपा को एहसास हो गया है कि संघ की ताक़त को नजरअंदाज करना उसके लिए महँगा सौदा साबित हुआ।

भाजपा-संघ की महाबैठक: यूपी पंचायत से विधानसभा तक चुनावी जंग का 'खाका' होगा तैयार

यही वजह है कि अब भाजपा और संघ ने मिलकर तालमेल को मज़बूत करने की कवायद तेज़ कर दी है। हाल ही में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं पर एक निजी विश्वविद्यालय विवाद में पुलिस लाठीचार्ज ने संघ और भाजपा के रिश्तों में खटास ला दी थी। संघ ने सरकार पर नाराज़गी जताई थी और युवाओं की अनदेखी को गंभीर माना था। अब भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि अगर युवा मोर्चे और आनुषांगिक संगठन नाराज़ हुए तो विपक्ष को बड़ा फायदा मिलेगा। इसलिए बैठक में इन संगठनों को साधने और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन की असंतुष्टि को दूर करने पर भी ज़ोर रहेगा। रविवार की बैठक में संघ के करीब 32 आनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। भाजपा की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह और सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष भी शामिल होंगे।

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सूत्र बताते हैं कि बैठक का मक़सद केवल चुनाव रणनीति ही नहीं बल्कि विपक्षी हमलों का मिलकर जवाब देना और समाज के हर वर्ग तक भाजपा-संघ के संदेश को पहुँचाना भी है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि संघ को यह डर है कि अगर भाजपा कमजोर पड़ी तो इसका असर सीधे संघ के सामाजिक सांस्कृतिक अभियानों पर पड़ेगा। दूसरी ओर भाजपा समझ रही है कि संघ की जमीनी पकड़ के बिना पंचायत से लेकर विधानसभा तक की जंग जीतना आसान नहीं। यही कारण है कि अब भाजपा और संघ एक ही छतरी के नीचे, मगर अलग अलग चेहरे के साथ, चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। रविवार की बैठक में यह साफ हो जाएगा कि भाजपा और संघ की साझा रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। यह बैठक न सिर्फ भाजपा और संघ के रिश्तों को नई मज़बूती देने वाली है, बल्कि यूपी की आने वाली सियासत की दिशा और दशा भी तय करेगी।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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