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करोड़ों की योजना 'फाइलों में कैद': अफसरशाही का लगा 'ग्रहण' !
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करोड़ों की योजना ‘फाइलों में कैद’: अफसरशाही का लगा ‘ग्रहण’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला-एक उत्पाद ‘ योजना, जो हजारों कारीगरों और छोटे उद्यमियों की तकदीर बदलने के लिए शुरू की गई थी, चित्रकूट मंडल में “अफसरशाही की सुस्ती और उद्यमियों की निष्क्रियता” के बीच “दम तोड़ती” नजर आ रही है। हालत यह है कि 90 प्रतिशत सरकारी अनुदान जैसी आकर्षक सुविधा मिलने के बावजूद दो साल बीत जाने पर भी मंडल के चारों जिलों में एक भी सामान्य सुविधा केंद्र पूरी तरह चालू नहीं हो सका।

करोड़ों की योजना 'फाइलों में कैद': अफसरशाही का लगा 'ग्रहण' !विचारणीय यह है कि जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने को तैयार है, तो आखिर योजना जमीन पर क्यों नहीं उतर रही? क्या जिम्मेदारों की लापरवाही सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है? सीएफसी योजना का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को एक ही छत के नीचे आधुनिक मशीनें, कच्चा माल, उत्पादन, पैकिंग और मार्केटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए 20 उद्यमियों का समूह बनाना होता है, जिसमें कुल लागत का केवल 10 प्रतिशत योगदान उद्यमियों को देना होता है, जबकि 90 प्रतिशत राशि सरकार अनुदान के रूप में देती है। इतनी बड़ी सहायता के बावजूद योजना का धरातल पर न उतरना कई सवाल खड़े कर रहा है।

करोड़ों की योजना 'फाइलों में कैद': अफसरशाही का लगा 'ग्रहण' !मंडल के चारों जिलों की स्थिति योजना की धीमी रफ्तार की कहानी खुद बयां कर रही है। इन उद्योगों से हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। बांदा में लगभग 30 इकाइयां, 1000 से अधिक लोगों को रोजगार। चित्रकूट में 100 इकाइयां, करीब 1500 लोगों को रोजगार। हमीरपुर में 31 इकाइयां, लगभग 450 लोगों को रोजगार। और महोबा में 70 इकाइयां, करीब 1200 लोगों को रोजगार। यदि सीएफसी समय पर बन जाते, तो इन उत्पादों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकिंग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सकती थी। लेकिन क्या विभागीय लापरवाही योजना को पीछे धकेल रही है, या फिर उद्यमियों में जागरूकता की कमी इसकी सबसे बड़ी बाधा है? संयुक्त आयुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि चित्रकूट में भवन तैयार है और जल्द मशीनें लगाई जाएंगी। बांदा में समिति गठित हो चुकी है, जबकि हमीरपुर और महोबा में समिति गठन के प्रयास जारी हैं।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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