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नाइट्रोजन बना 'धरती का दुश्मन': उपज की 'भूख' में बीमार हो रही मिट्टी, किसान 'बेखबर' !
उत्तर प्रदेश

नाइट्रोजन बना ‘धरती का दुश्मन’: उपज की ‘भूख’ में बीमार हो रही मिट्टी, किसान ‘बेखबर’ !

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

  • विनोद मिश्रा

बांदा। ज्यादा फसल पाने की लालसा अब जमीन को बंजर और भविष्य को संकट में डाल रही है। बांदा जिले की धरती अब थक चुकी है, बीमार हो चुकी है, लेकिन इलाज की जगह अब भी उससे “ज्यादा देने” की ज़िद जारी है। बबेरू, नरैनी और सदर तहसीलें रासायनिक उर्वरकों की नाइट्रोजन ओवरडोज़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रही हैं।

नाइट्रोजन बना 'धरती का दुश्मन': उपज की 'भूख' में बीमार हो रही मिट्टी, किसान 'बेखबर' !

कृषि विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर समय रहते किसान जागरूक नहीं हुए, तो आने वाला कल मिट्टी और मानव दोनों के लिए विनाशकारी हो सकता है।ध्यान रहे कि धान और गेहूं जैसी मुख्य फसलों में नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग पाया गया है। यही वह तत्व है जो जरूरत से ज्यादा डालने पर मिट्टी की उर्वरता को खोखला, सूक्ष्म जीवों को नष्ट और अन्य पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ देता है। कृषि विभाग की रिपोर्ट में इस ओवरडोज़ को “भविष्य का कृषि आपातकाल” करार दिया गया है।

नाइट्रोजन बना 'धरती का दुश्मन': उपज की 'भूख' में बीमार हो रही मिट्टी, किसान 'बेखबर' !

नाइट्रोजन की अधिकता का असर अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी अधिकता से मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। खाने की चीजों में अवशिष्ट तत्व रह जाते हैं, जो लीवर, किडनी और हार्मोनल सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। फसल बढ़ाने की होड़ में किसानों को यह अहसास ही नहीं कि वे अपनी ही जमीन को बर्बाद कर रहे हैं। कारण है जागरूकता की भारी कमी।

नाइट्रोजन बना 'धरती का दुश्मन': उपज की 'भूख' में बीमार हो रही मिट्टी, किसान 'बेखबर' !

कृषि विभाग की योजनाएं प्रचार तक सीमित हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर किसानों को वैकल्पिक खेती, मिश्रित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक जैविक विकल्पों की जानकारी नहीं दी जा रही। संयुक्त निदेशक (उर्वरक) डॉ. अमित पाठक ने अधिकारियों को चेताया है कि अगर किसानों को प्रशिक्षित कर नियंत्रित उपयोग की आदत नहीं डाली गई, तो अगले 5 वर्षों में बांदा की मिट्टी अपनी उत्पादन क्षमता खो सकती है। उन्होंने इस रिपोर्ट का विस्तृत प्रजेंटेशन भी दिया है।

 

 

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