- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड के बांदा में मोहर्रम पूरे देश में निराला है। यहां जैसे आयोजन शायद ही कहीं होते हों। यहां के सभी आयोजनों में बड़ी संख्या में मुस्लिमों के साथ हिंदू धर्म के लोग भी भागीदारी करते हैं। भाई चारे एवं गंगा जमुनी संस्कृति प्रेम के सागर की तरह हिलोरें लेती है।

इस जिले मोहर्रम के अतीत में झांके तो यहां ढाल सवारी की शुरुआत 1750 ईसवी में पुणे महाराष्ट्र के मराठा ठाकुर रामा जी ने किया था। तब से आज तक लगातार अलीगंज में उनके जरिए स्थापित इमामबाड़ा बरकरार हैं। उनके वंशज इस परंपरा को बरकरार रखे हैं। करीब 272 बरसों बाद भी यहां जाने में मुस्लिमों ने कभी परहेज नहीं किया।

मोहर्रम में जब मुस्लिम ढाल सवारी उठाते हैं तो धूनि लेने के लिए इसी इमामबाड़े में आते हैं। यहां से धूनि लेकर मुस्लिम कर्बला की ओर जाते हैं। मोहर्रम पर ताजिया, ढाल सवारी, अलम, मेला इत्यादि आयोजन मुस्लिम धर्मगुरुओं के नजरिए से गैर धार्मिक है। लेकिन बांदा में मोहर्रम के 10 दिन परंपरागत आयोजन हिंदू-मुस्लिम सौहार्द और एकता को लगातार मजबूत करते रहे हैं। शहर का सबसे प्राचीन रामा का इमामबाड़ा हिंदू मुस्लिम एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है।
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://newsreach-publishers.s3.ap-south-1.amazonaws.com/citynewsuttarpradesh.in/2018/06/Picsart_22-08-23_02-31-51-905-scaled.jpg)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_0000000055a072089a09490a85573f53-683x1024.png)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_00000000022872078732ec3f33441b29.png)
Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.
