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चित्रकूट मंडल हो गया तबाह : गांवों में "गूंज रही हैं सिसकियाँ और आह" !
उत्तर प्रदेश

चित्रकूट मंडल हो गया तबाह : गांवों में “गूंज रही हैं सिसकियाँ और आह” !

  • विनोद मिश्रा

बांदा। चित्रकूट मंडल तबाह हो गया है। यहां के “गांवों में हर ओर दुख के बादल और दिलों से आह और कराह निकल रही” है। विपत्ति के मारे ग्रामीणों का सरकारी बयानों पर विश्वास डगमगा चुका है। “बर्बादी के मंजर खून के आंसू रुला रही” है।
प्रकॄति की एक सप्ताह के भीतर दोहरी मार नें किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी है। बेमौसम आंधी -बरसात और ओला वृष्टि नें किसानों की चालिस से लेकर पचास प्रतिशत फसलों पर तबाही की इबारत लिख दी है।

चित्रकूट मंडल हो गया तबाह : गांवों में "गूंज रही हैं सिसकियाँ और आह" !
Chitrakoot Mandal has been devastated: “Sobs and sighs are echoing” in the villages!

चित्रकूट मंडल के चारों जिलों में रबी की फसल का रकबा करीब आठ लाख हेक्टेयर है। करीब 15 दिन में शुक्रवार को दूसरी बार बारिश-ओला और आंधी नें तबाही का कहर ढाया। ऐसे में हर बार प्राकृतिक प्रकोप से फसलों को नुकसान हो रहा है। दो बार के नुकसान को ही जोड़ लें तो जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 33 फीसदी से ऊपर पहुंच जाएगा। लेकिन हर बार सरकार के मुआवजा देने के तय मानक के अनुसार सर्वे में नुकसान नहीं होने का दावा किया जाता रहा है।

चित्रकूट मंडल हो गया तबाह : गांवों में "गूंज रही हैं सिसकियाँ और आह" !
Chitrakoot Mandal has been devastated: “Sobs and sighs are echoing” in the villages!

इस बार भी कुछ इसी तरह के हालात हैं। राजस्व विभाग की फसलों के नुकसान की फौरी तौर पर जो सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी गई है उसमें बांदा में करीब 10 से 15 फीसदी नुकसान, महोबा में महज पांच से दस फीसदी नुकसान, चित्रकूट में 15 से 18 फीसदी नुकसान और हमीरपुर जनपद में भी महज 15 फीसदी के आसपास ही फसलों का नुकसान होने का आकलन हुआ है,जबकि दोनों बार की बारिश मिलाकर अब तक किसानों का 40 फीसदी से ऊपर तक का नुकसान हो चुका है। ऐसे में सरकार से विपत्ति के कहर से जूझ रहे किसानों को मुआवजा मिलने की कोई किरण नजर नहीं आ रही है।

चित्रकूट मंडल हो गया तबाह : गांवों में "गूंज रही हैं सिसकियाँ और आह" !
Chitrakoot Mandal has been devastated: “Sobs and sighs are echoing” in the villages!

हां विकल्प के तौर पर बीमा कंपनियां हैं। कंपनियों से नुकसान का सर्वे कराने की शर्त है कि बारिश व ओलावृष्टि होने के बाद 72 घंटे के अंदर उनके टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई जाए। पर बीमा कंपनियां शिकायतें मुक्कमल तौर पर दर्ज कराने से कतरा सी रही है। गांवों में किसानों की हालत हालत बहुत दयनीय है। कैसे परिवार का पालेंगे पेट। महंगाई के चरमोत्कर्ष माहौल में पढ़ाई, लिखाई,दवाई , शादी -विवाह सहित अन्य जरूरी खर्चे की याद कर आहें गूंज रही है। सांसें हलक में अटकी हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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