- विनोद मिश्रा
बांदा। आजादी के पहले से लेकर अभी तक भौगोलिक, भौतिक एवं सामाजिक परिवर्तन तो हुआ है, लेकिन अन्नदाता आज भी भरण पोषण के लिये संघर्षरत है। किसान हमे देह और हाथ देकर देश बनाया है, तभी वह देहाती है। पाश्चात संस्कृति एवं उसका बढता प्रचलन किसानों के लिये हितकारी नही है। किसान दिन-रात एक करके फसल उगाता है, लेकिन उसे वाजिब मूल्य नही मिल पाता। किसान अन्ना प्रथा तो कभी, मौसम तो कभी, व्यवसायियो से डरता है। कृषि के क्षेत्र में भी किसानो की वजह से देश आत्मनिर्भर बन सका है। पिछले दो वर्ष देश के लिये बहुत ही खराब रहा है। बुन्देलखण्ड के विकास के लिये हमने माया नगरी छोड़ी है। बुन्देलखण्ड के विकास के लिये मेरा तन मन धन सब समर्पित है। बुन्देलखण्ड के विकास में नीतिकारो की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह बात बुन्देलखण्ड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुन्देला ने विश्वविद्यालय के 12वें स्थापना सप्ताह के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कही।

राजा बुन्देला ने छात्रो एवं शिक्षको से यह अपील की विकास में आपके ज्ञान, श्रम एवं विचार से सहयोग प्रदान करे। छात्रों से कहा कि आपको यह सोचना होगा कि समाज, संस्कृति एवंदेश के प्रति आपका कर्तव्य क्या हैै, इसे आपको ही तय करना है। एक लक्ष्य चुनना पडेगा तभी हम आगे बढ़ सकते हैं। राजा बुन्देला ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेन्द्र प्रताप सिंह का इस विशेष कार्यक्रम मे सम्मलित करने के लिये विशेष तौर पर आभार व्यक्त किया। उन्होने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय के विकास के लिये मै हर जगह खडा रहूंगा। उन्होंने एक कविता से अपने भाषण को विराम दिया। विश्वविद्यालय के कुुलपति ने कहा कि राजा बुंदेला को वह पिछले 40 वर्षो से जानते हैं। इस विश्वविद्यालय के विकास के लिये मै दिन रात लगा हूं। बुन्देलखण्ड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष होने के नाते हमे आपसे विश्वविद्यालय के विकास के लिये आशा भी है। बुन्देलखण्ड के लिये आपका जज्बा जिसे हम सलाम करते हैं। बुन्देलखण्ड के विकास के लिये सबसे पहले कृषि एवं पशुधन का विकास जरूरी है। यह विश्वविद्यालय अपने परिकल्पना के अनुसार शिक्षा, शोध एवं प्रसार कार्यो से विकास में सहभागिता निभा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि यहा के किसानो को विशेष तौर पर दलहनी फसलों के वैज्ञानिक खेती को अपनाने व कृषि विज्ञान के ज्ञान को जमीनी स्तर पर लाने के लिये उन्हे प्रायोगिक विधि से ज्ञान देना आवश्यक है। इसके लिये यहां पर उन्हें रहकर वैज्ञानिको के साथ प्रायोगिक ज्ञान प्राप्त करना होगा जिससे फसल की उत्पादक एवं उत्पादन क्षमता बढाई जा सके। कुलपति ने कहा कि राजा बुंदेला के माध्यम से एक किसान भवन एवं छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में बनाया जाने के लिए सहयोग अपेक्षित है।

– विवि में 12वें स्थापना सप्ताह समापन पर बोले मुख्य अतिथि
स्थापना सप्ताह के अवसर पर विश्वविद्यालय में पहली बार उत्कृष्ट शिक्षण कार्य हेतु उत्कृष्ट शिक्षक एवं उत्कृष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार दिये गये। उत्कृष्ट शिक्षक (युवा) सहायक प्रध्यापक, डा. बीके0 गुप्ता, उत्कृष्ट शिक्षक (वरिष्ठ) प्रध्यापक, डा. मुकुल कुमार तथा उत्कृष्ट वैज्ञानिक (युवा) सहायक प्रध्यापक, डा. सीएम सिंह व उत्कृष्ट वैज्ञानिक (वरिष्ठ) सह प्रध्यापक, डा. अखिलेश कुमार सिंह को प्रदान किया गया। कार्यक्रम के हीराष्ट्रीय सेवा योजना में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओ के विजयी प्रतिभागियों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. एसके सिंह ने सभी अतिथियो का स्वागत एवं स्थापना दिवस के बारे मंे विस्तार से बताया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डा. वीके सिंह ने स्थापना सप्ताह कार्यक्रम केे सफल आयोजन पर सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। डा. सौरभ ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
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