- विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के नव निर्वाचित प्रधानों में हाय-दईया मची है। जब उन्होने अपनी पंचायतों के खातों का खुल जा सिम-सिम किया तो वह आश्चर्य में पड़ गये। अंगूठा चूसने की स्थिति सी होगई कयोकि खजाना खाली था।

गांव की नई सरकारों को ग्राम पंचायत का खजाना खाली मिलने से उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। इन्हें फिलहाल सरकार से मिलने वाले बजट का इंतजार करना होगा। बुंदेलखंड में पद मुक्त हुईं ग्राम पंचायतों द्वारा छोड़े गए करीब 55 करोड़ रुपये प्रशासकों ने ठिकाने लगा दिए। 25 दिसंबर को कार्यकाल खत्म होने के बाद शासन ने यह प्रशासक नियुक्त किए थे।

27 मई को पहली बैठक के साथ नवनिर्वाचित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल शुरू हो चुका है। नए प्रधान गांवों में विकास कार्य की शुरुआत के लिए बेताब हैं, लेकिन बजट आड़े आ रहा है। ग्राम पंचायतों के खातों में पैसा नहीं है। बांदा में करीब 25 करोड़, महोबा में 13.80 करोड़, हमीरपुर 6 करोड़ और उरई (जालौन) में 10 करोड़ रुपये पिछली पंचायतों ने अपने खातों में छोड़े थे, लेकिन कुछ दिन के लिए नियुक्त हुए प्रशासकों ने आनन-फानन इन्हें ठिकाने लगा दिया। बांदा में खजाना खाली होने से ग्राम समितियों के खातों में फूटी कौड़ी नहीं है। कोरोना महामारी से निपटने और गांव के विकास के लिए छोटी सरकार बजट के लिए बड़ी सरकार से आस लगाए है। हालांकि, कोरोना काल में अधिकतर काम ठप रहे।

वित्तीय वर्ष 2019-20 में शासन की ओर से बांदा जिले की 469 ग्राम पंचायतों को 14वें व 15वें वित्त से 88 करोड़ का बजट दिया गया था। इस बजट में 63 करोड़ रुपये ग्राम प्रधानों ने अपने कार्यकाल के दौरान गांव के विकास कार्यों में खर्च कर डाले। ग्राम पंचायतें भंग होने के बाद 25 दिसंबर से 26 मई तक कार्यभार संभाले प्रशासकों ने शेष 25 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। अब संगठित 373 ग्राम पंचायतों के खातों में एक रुपया भी नहीं बचा। प्रधानों के सामने गांव के विकास और कोविड महामारी से निपटने की चुनौती है। नव निर्वाचित प्रधान बजट के लिए शासन का मुंह निहार रहे हैं। उधर, ग्राम प्रधानों का आरोप है कि शपथ व ग्राम पंचायत की पहली बैठक हो जाने के बाद भी जिला पंचायत राज विभाग उनके खाते नहीं खोल रहा है। सचिव ग्राम समिति के खाते का लेखा-जोखा नहीं दे रहे हैं।

– पहली बैठक हुई, मगर खाता नहीं खुला
तिंदवारी ब्लाक के पिपरगवां ग्राम पंचायत ग्राम प्रधान आशा देवी का कहना है कि पहली बैठक हो जाने के बाद भी जिला पंचायत राज विभाग खाता नहीं खोल रहा है। समिति के खाते की सचिव कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। कोरोना महामारी से निपटने के लिए उनके हाथ खाली हैं। ग्रामीणों के सहयोग से सैनिटाइजेशन और सफाई करा रही हैं।
– ग्राम समिति के पैसों का कोई लेखा-जोख नहीं
नरैनी ब्लाक के ग्राम पंचायत महोतरा प्रधान विमला अवस्थी का कहना है कि कोविड महामारी समेत गांव के विकास की कई चुनौतियां हैं। पहली बैठक हुए तीन दिन हुए, लेकिन अभी तक ग्राम समिति का संयुक्त खाता नहीं खुला। ग्राम समिति के पैसों का कोई लेखा-जोखा नहीं दिया जा रहा। कहा जाता है कि ग्राम समिति में एक भी पैसा नहीं बचा है। नरैनी ब्लाक के ग्राम पंचायत गुढ़ा कलां की प्रधान संतोष कुमार का कहना है कि गांव का विकास पहली प्राथमिकता है। ढेरों समस्याएं हैं। ग्राम समिति का खाता न खुलने से वित्तीय अधिकार नहीं हैं। वह एक रुपये भी नहीं खर्च कर सकते। यह भी नहीं पता कि खाते में बजट है या नहीं। सचिव ग्राम समिति के बजट की कोई जानकारी नहीं दे रहे।

महुआ विकास खंड के ग्राम पंचायत बड़ेहा स्योढ़ा के प्रधान प्रदीप द्विवेदी का कहना है कि 1600 की आबादी वाले इस गांव में कोरोना समेत अधूरे विकास कार्य पूरे कराने की चुनौती है, लेकिन न तो वित्तीय अधिकार है और न ही पैसा। ग्राम समिति में खाता भी नहीं खुला। सचिव खाते के बारे में नहीं बता रहे। महज सफाई ही कराई जा रही है।

अपर जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश चंद गुफ्ता का कहना है की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो गया था, लेकिन गांवों में ग्राम सचिवालय, सामुदायिक शौचालय कई कार्य अधूरे पड़े थे। प्रशासकों ने वर्ष 2019-20 के बचे बजट से इन कार्यों पूरा कराया है। वर्ष 2021-22 का बजट अभी नहीं आया है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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