
- शरद मिश्रा
बांदा। बिजली उपभोक्ताओं के ‘बढ़े हुए बिलों’ को लेकर ‘नया विवाद खड़ा’ हो गया है। सद्भावना विकास मंच ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने ‘लाखों उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली लोड’ उनकी अनुमति और पूर्व सूचना के बिना बढ़ा दिया, जिससे फिक्स चार्ज बढ़ गए और ‘हर महीने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ’ पड़ रहा है।
संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए इस ‘कार्रवाई को उपभोक्ता हितों के विपरीत’ बताते हुए ‘तत्काल निरस्त’ करने की मांग की है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि प्रदेश के करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का ‘स्वीकृत लोड स्वतः बढ़ा’ दिया गया। संगठन का कहना है कि इसका सी’धा असर बिजली बिलों पर पड़ा’ है। ‘फिक्स चार्ज बढ़ने’ से उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ‘अधिक भुगतान’ करना पड़ रहा है।
सद्भावना विकास मंच का आरोप है कि यह ‘फैसला उपभोक्ताओं को भरोसे में लिए बिना लागू’ किया गया। सपा नेता प्रमोद गुप्ता ‘राजा’ ने आरोप लगाया कि ‘बढ़े हुए लोड के कारण बड़ी संख्या में गरीब उपभोक्ता बिजली सब्सिडी की पात्रता से भी बाहर’ हो गए हैं। इससे ‘आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर दोहरी मार’ पड़ी है। उनका कहना है कि यह कदम ‘आम जनता के हितों के खिलाफ’ है और इसकी ‘उच्चस्तरीय जांच’ होनी चाहिए।
संगठन ने ज्ञापन में विद्युत आपूर्ति संहिता-2005 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी उपभोक्ता का स्वीकृत लोड बढ़ाने से पहले ‘नोटिस’ देना और ‘निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य’ है। आरोप है कि इसके बजाय विभाग ने सीधे बिलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से ‘लोड अपडेट’ कर दिया। संगठन ने मुख्यमंत्री से बिना अनुमति बढ़ाए गए लोड को तत्काल निरस्त करने, उपभोक्ताओं को राहत देने और प्रदेश में ‘निर्बाध बिजली आपूर्ति’ सुनिश्चित करने की मांग की है।
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