
- विनोद मिश्रा
बांदा। बबेरू विधानसभा सीट इस समय जिले की सबसे ‘हॉट और हॉटेस्ट सियासी सीट’ बन चुकी है। वजह साफ है सपा विधायक विशंभर सिंह यादव का “बढ़ता कद”। विशंभर यादव की “जमीनी पकड़ इतनी मजबूत” है कि भाजपा खेमे में अंदरखाने “रणनीति और गठबंधन” को लेकर “खलबली” मच चुकी है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी अब इस सीट को अपना दल एस को “सौंपने” पर विचार कर रही है, क्योंकि “अकेले दम पर चुनाव लड़ना भाजपा के लिए आत्मघाती साबित” हो सकता है।
बबेरू का समीकरण इस बार बिल्कुल अलग है। मैदान में सपा विधायक विशंभर सिंह यादव “अकेले भारी पड़” रहे हैं! जमीनी स्तर पर उनकी “सक्रियता और जनसंपर्क उन्हें बाकी सभी से आगे” रखता है। राजनीतिक चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि भाजपा सहित विभिन्न दलों के कार्यकर्ता भी अपने कामों के लिए उनके पास पहुंच रहे हैं। जब विरोधी दल के कार्यकर्ता भी सत्ता पक्ष के विधायक के दरवाजे पर जाएं, तो “समझ लीजिए जमीन किसके पास” है। यही “विशंभर फैक्टर” भाजपा की “रातों की नींद उड़ाए” हुए है।
उधर भाजपा के भीतर “टिकट को लेकर खींचतान” तेज है। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल टिकट के प्रबल दावेदार हैं, लेकिन उनकी “छवि करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोपों से सनी” है ! जिला पंचायत से जुड़े विवादों ने उन्हें “लोकप्रियता के निचले पायदान” पर पहुंचा दिया है। अंदर ही अंदर उन्हें तानाशाह एवं क्रूरता की कथित हदें पार करने वाला “छविधर” कहा जा रहा है।
वहीं अजय पटेल और चंद्रपाल सिंह कुशवाहा भी दौड़ में हैं, लेकिन पार्टी के भीतर ही इनकी जीत की संभावनाओं को लेकर अत्यधिक संशय बना हुआ है। इसी कमजोरी के चलते बबेरू सीट को “अपना दल एस” के खाते में डालने पर “गंभीर मंथन” चल रहा है। भाजपा के सामने अब सिर्फ 2 विकल्प हैं, खुद चुनाव लड़कर हार का जोखिम उठाए या गठबंधन को टिकट देकर जिम्मेदारी टाल दे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “अपना दल एस” के पक्ष में भी “जीत का एस” नहीं होने वाला। “उल्टा सीट सहयोगी को देने से स्थानीय भाजपा नेताओं में असंतोष और बढ़ेगा”।
बबेरू में मुकाबला अब पार्टी बनाम व्यक्ति नहीं रहा। यह “संगठन बनाम जनाधार की लड़ाई” है। और जनाधार के मामले में विशंभर सिंह यादव भाजपा पर भारी पड़ रहे हैं। अब प्रश्न यह है क्या भाजपा बबेरू सीट पर बड़ा दांव खेलेगी ? या फिर गठबंधन की रणनीति अपनाकर मैदान से पीछे हटेगी ? फिलहाल सारे संकेत यही हैं कि “बबेरू की हवा विशंभर के साथ” है।
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