
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड में पांच साल में दोगुना मगरमच्छों का कुनबा दो गुना हो गया है। यह बेतवा नदी के आसपास धूप सेंकते नजर आते हैं। पारिस्थितिक तंत्र पर अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ डॉ. गिरीश मिश्रा के अनुसार, कोरोनाकाल से पहले बेतवा नदी के बहाव क्षेत्र में करीब 2700 मगरमच्छों का अनुमान था। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर लगभग 5500 से अधिक हो गई है।
बुंदेलखंड में बहने वाली बेतवा नदी का पानी इनके लिए अनुकूल साबित हो रहा है। वन विभाग के मुताबिक बेहतर संरक्षण और प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के चलते बीते पांच वर्षों में इनकी संख्या करीब दोगुनी हो गई है। अवैध शिकार पर सख्ती, रेत खनन पर निगरानी और घोंसलों की सुरक्षा जैसे उपायों से इनके प्राकृतिक प्रजनन में बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर लगभग 5500 से अधिक हो गई है। संख्या बढ़ने के साथ अब ये मगरमच्छ अक्सर नदी किनारे धूप सेंकते दिखाई देते हैं।
हमीरपुर, बबीना, माताटीला बांध और ओरछा समेत आसपास के इलाकों में रोजाना मगरमच्छों को धूप में आराम करते देखा जा सकता है। वन विशेषज्ञों का मानना है कि मगरमच्छों की बढ़ती संख्या नदी के संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। डीएफओ नीरज आर्य के अनुसार सुरक्षित वातावरण और संरक्षण उपायों के चलते इनकी आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे क्षेत्र में इको टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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