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बांदा का 30 साल पुराना 'जख्म' तेरा-पथरा पुल: 'कालिंजर से सतना' तक 'विकास' की 'राह' बंद
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बांदा का 30 साल पुराना ‘जख्म’ तेरा-पथरा पुल: ‘कालिंजर से सतना’ तक ‘विकास’ की ‘राह’ बंद

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बांदा के विकास की सबसे बड़ी विडंबनाओं में शामिल ‘तेरा-पथरा घाट’ आज भी सरकारी फाइलों और चुनावी वादों के बीच झूल रहा है। करीब 30 वर्षों से जिस पुल की मांग हजारों ग्रामीण कर रहे हैं, वह आज तक धरातल पर नहीं उतर सका। हर चुनाव में नेताओं ने पुल बनाने का भरोसा दिया, सर्वे भी हुए, प्रस्ताव भी तैयार हुए, लेकिन नतीजा आज भी शून्य है। बरसात आते ही बागे नदी उफान पर होती है और विकास के तमाम दावे भी उसी धारा में बह जाते हैं। बांदा के कालिंजर और मध्य प्रदेश के सतना को जोड़ने वाला तेरा-पथरा घाट केवल एक संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा है।

बांदा का 30 साल पुराना 'जख्म' तेरा-पथरा पुल: 'कालिंजर से सतना' तक 'विकास' की 'राह' बंदयदि यहां पुल बन जाए तो दोनों राज्यों के बीच दूरी कई किलोमीटर कम हो जाएगी। व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि गतिविधियों को नई गति मिलेगी। लेकिन तीन दशक से यह सपना केवल कागजों तक सीमित है। ग्रामीण बताते हैं कि 1995 से लगातार पुल निर्माण की मांग उठाई जा रही है। आंदोलन हुए, ज्ञापन दिए गए, जनप्रतिनिधियों से मुलाकातें हुईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। वर्ष 2017 में तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के मंत्री ने मौके का निरीक्षण कर पुल निर्माण के लिए सर्वे कराने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग ने तेरा और पथरा के बीच सर्वे कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया और शासन को भेज दिया। उस समय ग्रामीणों को लगा कि अब वर्षों का इंतजार खत्म होगा, लेकिन प्रस्ताव आज भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में धूल फांक रहा है।

बांदा का 30 साल पुराना 'जख्म' तेरा-पथरा पुल: 'कालिंजर से सतना' तक 'विकास' की 'राह' बंदसबसे अधिक संकट बरसात के मौसम में खड़ा होता है। बागे नदी में जलस्तर बढ़ते ही तेरा-पथरा घाट का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। नरैनी तहसील, ब्लॉक मुख्यालय, जिला अस्पताल और बांदा शहर तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास का सबसे बड़ा पैमाना सड़क और पुल होता है, लेकिन उनके हिस्से में आज भी इंतजार ही आया है। निराश ग्रामीणों ने अब सीधे मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस परियोजना को तत्काल मंजूरी देने की मांग की है। वर्षों से अधूरी पड़ी यह परियोजना अब सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं की भी परीक्षा बन चुकी है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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