
- विनोद मिश्रा
चित्रकूट। जिले का कथित तौर नियमों को धता बताकर चल रहा वाटर पार्क में प्रशासन को शायद लाशें गिनने का इंतजार है? आरोप लग रहे हैं की प्रशासन पर भाजपा का दबाव है शांत रहें चलने दें? भाजपा नेताओं के कथित वरद हस्त होने के कारण यह वाटर केमिकल बर्न पार्क बन जाता है। यहां का न्यू वाटर पार्क गर्मी में ठंडक देने की बजाय बिना सही नियमों का पालन एवं निरीक्षण न होने से रह वाले अब जानलेवा बननें की डगर पर है।
वाटर पार्क का संचालक शानू का दावा है की पालिका अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता मेरे रिस्ते में चाचा हैं। हम सब भाजपाई हैं। नियमावली हमारे ठेंगे पर हैं! जिम्मेदार अधिकारियों से हमारी बल्ले बल्ले हैं! यहां समझ लीजिये की वाटर पार्क के लिये पालिका एवं पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, ऐसे हालात में तो “सइयां भये कोतवाल” की कहानी चरित्रार्थ हो रही है!
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो ने आईएस 15475 और आईएस 15492 जैसे सख्त सुरक्षा मानक तय कर रखे हैं। जिला प्रशासन की गाइडलाइंस अलग से हैं। पर जमीनी हकीकत यह है कि नियम सिर्फ फाइलों में तैर रहे हैं, इस खतरनाक वाटर पार्क में नहीं! नियम कहता है कि वाटर पार्क का स्थानीय पर्यटन विभाग और नगर निकाय में पंजीकरण अनिवार्य है। पानी की गुणवत्ता के लिए क्लोरीन का तय मात्रा में इस्तेमाल जरूरी है। पानी में जांच के नाम पर साहब लोग एसी गाड़ी से आते हैं, कोल्ड ड्रिंक पीकर चले जाते हैं।
बीआईएस का मानक साफ है। प्रशिक्षित लाइफ गार्ड की तैनाती अनिवार्य है। उनकी नजर हर सेकंड पार्क और स्लाइड पर होनी चाहिए। हाई क्वालिटी सीसीटीवी भी जरूरी है। मौके पर मिलता क्या है। गार्ड की जगह छह हजार वाला लड़का बैठा है जिसे शायद ही तैरना आता हो! सीसीटीवी के नाम पर दीवार पर डमी कैमरे टंगे हैं। हादसा हुआ तो फुटेज मांगने पर कहेंगे ‘सर, कैमरा तो खराब था’।
गाइडलाइन के मुताबिक परिसर में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होना चाहिए। डॉक्टर या नर्स के साथ नजदीकी अस्पताल से टाई-अप जरूरी है। असल में फर्स्ट एड बॉक्स में डेटॉल की शीशी और दो पट्टी से ज्यादा कुछ नहीं मिलता। किसी का पैर फिसला तो बर्फ रगड़ दो। ज्यादा खून निकला तो बोलेंगे ‘प्राइवेट अस्पताल ले जाओ’। हर राइड के पास ऊंचाई,आयु और वजन की सीमा लिखना अनिवार्य है। फिसलन वाले क्षेत्रों में सही मुद्रा के निर्देश देने हैं। नायलॉन कॉस्ट्यूम पहनना जरूरी है ताकि कपड़े न फंसें। यहां ऑपरेटर खुद नहीं जानता कि किस राइड पर कितने वजन का आदमी बैठ सकता है।
मानक कहता है कि दिल की बीमारी या ब्लड प्रेशर वाले लोगों को भारी राइड्स से दूर रखा जाए। चेतावनी बोर्ड लगाना जरूरी है। पर टिकट काउंटर पर कोई नहीं पूछता कि ‘साहब, बीपी तो ठीक है ना’। 450 रुपये का टिकट कटा और सीधा मौत की स्लाइड पर धक्का दे दिया। जब आईएस 15475 और आई एस 15492 साफ कहते हैं कि जान की कीमत पर मौज नहीं, तो न्यू वाटर पार्क यहां किसकी गारंटी पर नियमों का पालन नहीं कर रहा। क्या चित्रकूट के न्यू वाटर पार्क में भी लाशें गिरने का इंतजार है? क्योंकि नियम तो तब याद आएंगे जब अखबार की हेडलाइन बनेगी।
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