
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड की सूखी धरती अब सोना उगलेगी ! एक दौर था जब यहां के किसान कृषि की ऊंची लागत और सीमित लाभ से परेशान थे, लेकिन अब मूंगफली की खेती किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। मूंगफली अब न केवल बुंदेलखंड के खेतों में लहलहाएगी बल्कि किसानों की जेबें भी भरने वाली है। प्रदेश सरकार ने इसे लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। मूंगफली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड में नया हब बनाने की रणनीति तेज़ हो गई है।

पिछले साल तक जहां मूंगफली का रकबा 1.67 लाख हेक्टेयर था, वहीं इस बार यह बढ़कर 1.79 लाख हेक्टेयर हो चुका है। यदि दलहन और तिलहन दोनों को मिलाया जाए तो यह आंकड़ा 2.70 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। और यदि श्रीअन्न (जैसे ज्वार, बाजरा) को भी खरीफ के आंकड़ों में जोड़ा जाए तो कुल रकबा 3.34 लाख हेक्टेयर को पार कर चुका है। बुंदेलखंड में मूंगफली के उत्पादन में झांसी शीर्ष पर है, लेकिन बांदा, महोबा, हमीरपुर और ललितपुर जैसे जिले भी तेजी से आगे आ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में इन जिलों में लगातार मूंगफली के रकबे में इज़ाफा हुआ है।

इससे साफ है कि किसान अब मूंगफली को मुनाफे की फसल के रूप में देखने लगे हैं। कृषि विभाग मूंगफली को लेकर दोहरे मोर्चे पर काम कर रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की आपूर्ति, ताकि उत्पादन बेहतर हो। मंडी और निर्यात की व्यवस्था, जिससे किसानों को उपज का वाजिब दाम मिल सके। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बरसात शुरू हो चुकी है, ऐसे में धान की नर्सरी की तैयारी भी करें और जहां ज़मीन में नमी पर्याप्त है, वहां मूंगफली की बुआई तत्काल शुरू कर सकते हैं।

मूंगफली की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मांग लगातार बढ़ रही है। चीन, मलेशिया, अमेरिका जैसे देशों में मूंगफली निर्यात करने की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं। ऐसे में अगर सरकार और किसान मिलकर उत्पादन बढ़ाएं तो बुंदेलखंड का यह इलाका मूंगफली का वैश्विक केंद्र बन सकता है। स्थानीय किसान नेता रामबाबू निषाद ने बताया कि “मूंगफली कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है। पानी की खपत भी कम है। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र के लिए यह सबसे मुफीद फसल बन गई है।” किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए भी विभाग ग्राम स्तर पर कैंप आयोजित कर रहा है। सरकार की नीतियां और किसानों की मेहनत साथ रही तो वह दिन दूर नहीं जब मूंगफली की खुशबू बुंदेलखंड के हर खेत में फैलेगी और किसान मुस्कराते हुए कहेंगे “ये मूंगफली नहीं हमारा सोना है !”
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