
- शरद मिश्रा
बांदा। किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। खेतों के बीच जबरन ठोंके जा रहे हाईटेंशन टावरों और मनमाने ढंग से खींची जा रही बिजली लाइनों के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार को किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर विद्युत विभाग और ठेकेदारों पर “जमीन कब्जाने जैसी तानाशाही” का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि बिना सहमति, बिना पारदर्शिता और बिना मानकों का पालन किए खेतों के बीच विशाल टावर खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि विभाग ने नियमों को कूड़ेदान में फेंककर एक ही परिवार की कई उपजाऊ जमीनों को टेढ़े-मेढ़े तरीके से काट डाला, जिससे खेती तबाह होने की कगार पर पहुंच गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन खेतों से परिवार का पेट पलता था,अब उन्हीं खेतों पर “लोहे के राक्षस: खड़े किए जा रहे हैं। बड़े-बड़े टावर लगने के बाद न ट्रैक्टर ठीक से चल पाएगा, न सिंचाई होगी और न भविष्य में कोई निर्माण संभव होगा। किसानों ने साफ कहा कि यह सिर्फ बिजली लाइन नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी पर सीधा हमला है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस मनमानी का विरोध किया तो विभागीय अधिकारी और ठेकेदार धमकी पर उतर आए। किसानों को झूठे मुकदमों में फंसाने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस कार्रवाई कराने की धमकियां दी जा रही हैं, ताकि अन्नदाता डरकर चुप हो जाए। पीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि प्रस्तावित हाईटेंशन लाइन और टावरों को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट कराया जाए।
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