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उजाले का कत्ल,अंधेरे में नहीं छिपा:26 साल बाद हाईकोर्ट द्वारा कातिलों की उम्रकैद पर 'फाइनल मुहर'
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उजाले का कत्ल, अंधेरे में नहीं छिपा: 26 साल बाद ‘हाईकोर्ट’ द्वारा कातिलों की उम्रकैद पर ‘फाइनल मुहर’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। छावनी चौराहे की वो ‘खूनी दोपहर’ 26 साल बाद इंसाफ के कटघरे में पूरी हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमील प्रधान हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे फारुख और फीमा की सजा पर आखिरी मुहर लगा दी। जमानत पर बाहर घूम रहे दोनों कातिलों को अब तुरंत सरेंडर करना होगा। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने साफ कहा दिनदहाड़े हुई वारदात पर चश्मदीदों की अचूक गवाही से संदेह की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।’ मतलब, जब कत्ल दोपहर 2 बजे सबके सामने हुआ हो, तो कातिलों की ‘पहचान’ और ‘जगह’ पर सवाल ही नहीं उठता।

दोहरे हत्याकांड में 17 साल बाद सजा का ऐलान: पांच दोषियों को उम्रकैद, जुर्माना भी लगाया25 नवंबर 2002, दोपहर करीब 2 बजे। गोयरा गांव के तत्कालीन प्रधान जमील खान अपने भाइयों के साथ अनाज का सौदा कर दिलहागंज से लौट रहे थे। छावनी चौराहे पर रंजिश में घात लगाए बैठे गांव के ही फारुख और फीमा बाइक से आए और देसी पिस्तौल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। छाती और बांह में गोली लगने से लहूलुहान जमील ने अगले दिन कानपुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। हमले में एक राहगीर भी घायल हुआ था। चश्मदीद उबैद और अली हुसैन ने कोर्ट में वारदात का ऐसा ‘लाइव टेलीकास्ट’ सुनाया कि जजों ने कहा इनकी गवाही पर अविश्वास का कोई कारण नहीं।

शासकीय अधिवक्ता की हैरानी भरी लापरवाही से डीएम को जारी हुआ वारंटपुलिस ने आरोपी फीमा की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल देसी असलहा और कारतूस बरामद किए। हाईकोर्ट ने इसे पुख्ता सबूत माना। कोर्ट ने माना कि पूरी वारदात दिन के उजाले में हुई, इसलिए न हमलावरों की पहचान पर विवाद है, न घटनास्थल पर संशय बांदा सत्र न्यायालय ने 2005 में ही दोनों को उम्रकैद सुना दी थी। सजा के खिलाफ फारुख-फीमा हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन यहां भी किस्मत ने दगा दे दिया। अपील खारिज होते ही अब दोनों को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा। हाईकोर्ट के इस फैसले ने साबित कर दिया कि इंसाफ देर से मिला, पर दुरुस्त मिला। और जब गवाह की जुबान गोली से ज्यादा ताकतवर हो, तो कातिल कितना भी शातिर हो, बच नहीं सकता।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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