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कृषि विभाग की 'कागजी खेती': मोटे अनाज की 'हवा-हवाई' पैदावार, ज़मीन पर 'गायब' है सच्चाई
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कृषि विभाग की ‘कागजी खेती’: मोटे अनाज की ‘हवा-हवाई’ पैदावार, ज़मीन पर ‘गायब’ है सच्चाई

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। कृषि विभाग के “झूठे आश्वासन और हास्यास्पद लक्ष्य” क्या “किसान सचमुच इस बार दोगुना पैदावार कर पाएंगे ?” वर्तमान में कृषि विभाग की नीतियों ने एक बार फिर से “किसानों को झूठे वादों के जाल में फंसा” दिया है। हाल ही में कृषि विभाग ने अन्नदाता को “नए मोटे अनाज” उगाने के लिए किसानी में “दोगुना उत्पादन का लक्ष्य” तय कर दिया है, लेकिन यह लक्ष्य क्या सत्य है, या सिर्फ झूठा आश्वासन? यह सवाल अब हर किसान के दिल में गूंज रहा है।

कृषि विभाग की 'कागजी खेती': मोटे अनाज की 'हवा-हवाई' पैदावार, ज़मीन पर 'गायब' है सच्चाईकृषि विभाग ने इस साल मोटे अनाजों की बुआई के लिए जो लक्ष्य तय किया है, वह न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह किसानों की मुसीबत और बेहद दुरुह परिस्थिति में न केवल बढ़ोतरी करेगा, बल्कि यह कृषि विभाग की नपुंसकता को भी उजागर करेगा। वर्ष 2023-24 के लिए 92 हजार हेक्टेयर में “मोटे अनाज उगाने का लक्ष्य” रखा गया है, जिसमें ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, सांवा, कोदो जैसे पुराने फसल शामिल हैं। लेकिन धरातल पर इस लक्ष्य की कोई प्रामाणिकता नहीं है।

"श्री" नहीं बन पाई "भाग्य श्री" : सरकारी कवायदें चारों खानें चित्त ! खुल गई लफ्फाजी ?कृषि विभाग का दावा है कि इस साल मोटे अनाजों की बुआई में वृद्धि हो रही है और मानसून के साथ खरीफ की फसलों में इस वर्ष दोगुनी बुआई का लक्ष्य है। लेकिन धरातल पर किसान इन लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। पहले से ही सूखा, पानी की कमी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से परेशान किसान अब कृषि विभाग की झूठी घोषणाओं और अवास्तविक लक्ष्यों के शिकार हो रहे हैं।

कृषि विभाग की 'कागजी खेती': मोटे अनाज की 'हवा-हवाई' पैदावार, ज़मीन पर 'गायब' है सच्चाईकृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, कोदो, रामदाना आदि फसलों के उत्पादन में कम पानी की आवश्यकता होती है और सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके बावजूद, किसान इन फसलों को अब खेतों में कम ही उगाते हैं, क्योंकि वर्तमान बाजार की मांग और सरकारी मदद न के बराबर होती है। पुराने जमाने में ये फसलें प्रमुख थीं, लेकिन बदलते समय और अर्थव्यवस्था के चलते अब किसान इनसे मुंह मोड़ चुके हैं। वहीं, उप निदेशक कृषि विजय कुमार का कहना है कि इस साल किसानों को मोटे अनाजों की बुआई में निरंतर समर्थन और मदद मिलेगी, लेकिन कृषि विभाग की झूठी घोषणाएं और आडंबर केवल किसानों की उम्मीदों को और तोड़ने का काम करती हैं।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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