– कृषि विवि में कार्यशाला का आयोजन कर किसानों को मसालों की खेती करने को किया प्रेरित
- विनोद मिश्रा
बांदा। कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डा. यूएस गौतम ने कृषि प्रसार विभाग, कृषि महाविद्यालय द्वारा बुन्देलखण्ड क्षेत्र में मसाला वर्गीय फसलों के उत्पादन के मुद्दे एवं रणनितियां पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य बोलते हुए कहा कि वर्तमान कोरोना महामारी के चलते विश्व ने भारतीय मसालों के महत्व को समझा है। विभिन्न मसालों की वजह से आज पूरी दुनिया हमारी तरफ देख रही है। भारतीय मसालों में रोग प्रतिरोधी क्षमता अत्यधिक होने के कारण अन्र्तराष्ट्रीय बाजार में इसका महत्व एवं डिमांड दोनों बढ़ा है। प्राचीनकाल से ही भारतीय हल्दी, अदरक, धनिया, दालचीनी, जीरा, सौंफ और मेथी हमारे खाने का मुख्य घटक रहा है। कोरोना काल में हल्दी और अदरक का उपयोग बढ़ा है। साथ ही तुलसी दालचीनी व अन्य औषधि गुण वाले फसलों का महत्व भी बढ़ा है। कार्यशाला एकीकृत उद्यानिकी विकास मिशन के अन्तर्गत मसाला एवं सुपारी विकास निदेशालय कालीकट, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से आयोजित की गई।


कुलपति ने कहा कि बुन्देलखण्ड मे मसालों की खेती के लिये उपयुक्त जलवायु, मिट्टी के साथ-साथ बाजार भी सुलभ है। कृषि विश्वविद्यालय बांदा द्वारा बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में मसालों की खेती को बढ़ावा देने के लिए पिछले कई वर्षो से निरंतर कार्य चल रहे हैं। इस आयोजन के लिये परियोजना के प्रधान अन्वेषक व कृषि प्रसार विभाग के विभागाध्यक्ष डा. भानु प्रकाश मिश्रा एवं उनकी टीम को बधाई दी। कार्यशाला में आयोजन का मुख्य उद्देश्य एवं इसके परिदृश्य पर चर्चा करते हुये परियोजना के प्रधान अन्वेषक व कृषि प्रसार विभाग के विभागाध्यक्ष डा. भानु प्रकाश मिश्रा ने बताया कि बुन्देलखण्ड में मुख्य रूप से हल्दी, अदरक, धनियां, मेथी व औषधीय फसल तुलसी पर कार्य चल रहा है। डा. मिश्रा ने बताया कि इसी परियोजना अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र महोबा एवं ललितपुर में पान की खेती को बढावा देने हेतु पान बरेजा लगाया जा रहा है। अदरक में राइजोम गलन की समस्या प्रमुख बीमारी है। इसके दृष्टिगत इस वर्ष वानिकी महाविद्यालय में एक लैब की स्थापना की जा रही है।

कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव तथा अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डा. जीएस पवांर ने कहा कि मसला में लहसुन, अदरक, हल्दी तथा मिर्च पैदाकर हम बुन्देलखण्ड में वैश्विक बाजार को आकर्षित कर सकते हैं। कार्यक्रम के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के उद्यान विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. आरके शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में मसालों की मांग बढ़ी है। कृषकों के लिये यह एक सुनहरा अवसर है। डा. शर्मा ने कहा कि बुन्देलखण्ड में आर्गेनिक मसालों का क्षेत्र हो सकता है, जिसका बाजारा मूल्य किसनों को अच्छा प्राप्त हो सकता है। किसान संगठित होकर इस कार्य को और आगे बढ़ा सकते हैं। आभार प्रदर्शन डा. एसी मिश्रा तथा संचालन डा. धीरज मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र झांसी, महोबा जालौन हमीरपुर तथा बांदा के प्रगतिशील मसाला कृषक के साथ-साथ सह निदेशक प्रसार डा. नरेन्द्र सिंह, सह निदेशक शोध डा. एसी मिश्रा, डा. मुकुल कुमार, डा. वीके सिंह, डा. एसके सिंह, डा. संजीव कुमार, डा. आरके सिंह, डा. जे. पाठक, डा. श्याम सिंह, डा. सुभाषचन्द्र सिंह, डा. प्रशांत सिंह, डा. बृजेश पाण्डेय, डा. अमित कनौजिया, डा. अचर्ना दीक्षित, डा. अर्जुन प्रसाद, डा. बीके गुप्ता, डा. पंकज ओझा व अन्य प्राध्यापकगण छात्र एवं छात्रायें उपस्थित रहे।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_0000000055a072089a09490a85573f53-683x1024.png)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_00000000022872078732ec3f33441b29.png)
Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.
