
- शरद मिश्रा
बांदा। डीएम अमित आसेरी ने कलेक्ट्रेट सभागार में आईजीआरएस समीक्षा बैठक में अफसरों की ‘एसी वाली कार्यशैली’ पर जमकर लगाम कसी। डीएम ने साफ कर दिया कि अब जनशिकायतों का निस्तारण ‘कॉपी-पेस्ट रिपोर्ट’ और ‘डिस्पोज बटन’ से नहीं होगा। हर शिकायत का इलाज मौके पर जाकर, शिकायतकर्ता से रूबरू होकर और ‘दर्द’ समझकर करना पड़ेगा। यानी अब ‘फाइलें’ नहीं, ‘अफसर’ फील्ड में दौड़ेंगे। डीएम आसेरी ने ‘दो टूक’ कहा कि निस्तारण का इकलौता मानक ‘शिकायतकर्ता की संतुष्टि’ है। तथ्य-साक्ष्य के बिना निपटाई गई शिकायत को उन्होंने “असंतोषजनक कागजी खानापूर्ति” बताकर फटकार लगाई। बोले ‘जनता को न्याय चाहिए,बहाना नहीं’।
औपचारिक निस्तारण पर डीएम की त्योरियां ऐसी चढ़ीं कि बैठक में मौजूद “अफसरों की कलम भी सहम” गई। लंबित प्रकरणों को ‘रेड अलर्ट‘ पर डालते हुए डीएम ने प्राथमिकता से निपटाने का अल्टीमेटम दिया। हिदायत दी कि जनसमस्याओं के समाधान में जवाबदेही, पारदर्शिता और संवेदनशीलता ‘ऑप्शनल’ नहीं, ‘कम्पलसरी सब्जेक्ट’ है। डीएम ने चेताया कि शासन की मंशा ‘तारीख पर तारीख’ नहीं, ‘तुरंत इंसाफ’ है। जनसुनवाई को ‘रस्म अदायगी’ से निकालकर ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ बनाने का फरमान सुनाया। डीएम के तेवर देख अफसरों में खलबली है। बैठक से निकले एक अधिकारी ने दबी जुबान में कहा अब समझ आ गया, ‘डिस्पोज’ का मतलब ‘दफनाना’ नहीं होता। डीएम ने स्पष्ट किया कि अब हर महीने आईजीआरएस की ‘परफॉर्मेंस रिपोर्ट’ बनेगी और ‘फेल’ होने वाले अफसरों पर ‘कार्रवाई की कलम’ चलेगी।
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