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अशोक सिंह गौर खफा: पैलानी में क्यों नहीं बना डाक बंगला, फाइल में 'सो' रहा स्वीकृत गेस्ट हाउस !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

अशोक सिंह गौर खफा: पैलानी में क्यों नहीं बना डाक बंगला, फाइल में ‘सो’ रहा स्वीकृत गेस्ट हाउस !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। सिस्टम की लापरवाही का इससे बड़ा नमूना क्या होगा कि तहसील मुख्यालय बनने के 11 साल बाद भी पैलानी में “डाक बंगला” नहीं बन सका। स्वीकृत योजना, अधिग्रहीत जमीन और पीडब्लूडी की जिम्मेदारी के बाद भी “गेस्ट हाउस फाइलों में दबा पड़ा” है। अब सपा नेता अशोक सिंह गौर ने इस “लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोल” दिया है। अशोक सिंह गौर ने सीधे जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला लाकर अफसरशाही को कठघरे में खड़ा किया है।

अशोक सिंह गौर खफा: पैलानी में क्यों नहीं बना डाक बंगला, फाइल में 'सो' रहा स्वीकृत गेस्ट हाउस !

सपा नेता अशोक सिंह गौर का कहना हैं की पैलानी तहसील मुख्यालय है। यहां हर हफ्ते डीएम, एसपी, एसडीएम समेत बड़े अफसरों का दौरा होता है। पर रुकने के लिए एक भी सरकारी डाक बंगला नहीं है। अफसर या तो 30 किमी दूर बांदा भागते हैं या निजी घरों में रुकते हैं। अशोक सिंह गौर ने पूछा कि जब तहसील का दर्जा दे दिया तो बुनियादी सुविधा क्यों छीन ली।

सपा का विधान सभा 'सर्वे' कार्ड: विधायक विशंभर, अशोक एवं दीपा पर 'दांव' !अशोक सिंह गौर ने बताया कि उनकी पत्नी दीपा सिंह गौर जब जिला पंचायत सदस्य थीं, तब सपा सरकार में पैलानी के लिए डाक बंगला स्वीकृत कराया था। तत्कालीन डीएम सुरेश कुमार ने पैलानी ग्राम सभा में गाटा संख्या 2215 में 0.8210 हेक्टेयर बाकायदा जमीन का अधिग्रहण कराया । निर्माण का जिम्मा पीडब्लूडी को मिला। पर अफसरों ने फाइल को ऐसी जगह दबाया कि 11 साल में एक ईंट भी नहीं रखी गई। अशोक सिंह गौर ने इसे सिस्टम की आपराधिक लापरवाही बताया।

अशोक सिंह गौर खफा: पैलानी में क्यों नहीं बना डाक बंगला, फाइल में 'सो' रहा स्वीकृत गेस्ट हाउस !

सपा नेता अशोक सिंह गौर ने कहा कि यह सिर्फ बिल्डिंग का मामला नहीं, प्रशासनिक इच्छाशक्ति का सवाल है। स्वीकृत योजना को 11 साल तक लटकाना जनता के साथ धोखा है। उन्होंने मांग की कि पीडब्लूडी के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो और डाक बंगले का काम शीघ्र शुरू कराया जाए। उन्होंने चेताया कि अगर अब भी फाइल नहीं हिली तो सपा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।  पैलानी का “डाक बंगला सरकारी तंत्र की सुस्ती की कहानी खुद बयां” कर रहा है। स्वीकृति है, जमीन है, बजट का प्रावधान है, पर नीयत नहीं है। अशोक सिंह गौर के सवालों ने अब पीडब्लूडी और जिला प्रशासन दोनों को जवाबदेही के कटघरे में खड़ा कर दिया है। देखना है कि डीएम फाइल से धूल झाड़ते हैं या पैलानी का डाक बंगला अगली सरकार का इंतजार करता है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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