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October 10, 2026
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विधायक प्रकाश ने 'भुजा उठाकर' लिया 'प्रण': शिक्षा को नहीं बननें देंगेव्यापार,सीएम को 'पत्र'
उत्तर प्रदेश

विधायक प्रकाश ने ‘भुजा उठाकर’ लिया ‘प्रण’: शिक्षा को नहीं बननें देंगे व्यापार, सीएम को ‘पत्र’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। निजी विद्यालयों की “मनमानी और बढ़ती फीस” के खिलाफ अब “सियासी स्तर पर खुला मोर्चा” शुरू हो गया है। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने “भुजा उठाकर यह प्रण” लिया है कि शिक्षा के नाम पर हो रही “लूट और मनमानी” को किसी भी हाल में “बर्दाश्त” नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने आरोप लगाया कि जिले में संचालित निजी शिक्षण संस्थान शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि व्यवसाय बना चुके हैं, जहां छात्रों और अभिभावकों का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण किया जा रहा है। कहा कि हर साल मनमाने ढंग से पाठ्यक्रम बदलकर अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

विधायक प्रकाश ने 'भुजा उठाकर' लिया 'प्रण': शिक्षा को नहीं बननें देंगेव्यापार,सीएम को 'पत्र'उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार पाठ्यक्रम बदलने से बड़े बच्चों की किताबें छोटे भाई-बहनों के काम नहीं आ पातीं, जिससे संसाधनों की बर्बादी औऱ परिवारों पर दोहरी मार पड़ती है। इसके साथ ही बच्चों के स्कूल बैग के अत्यधिक वजन को उन्होंने गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यह उनके शारीरिक विकास के लिए खतरा बनता जा रहा है। विधायक प्रकाश ने अपने पत्र में पर्यावरणीय पहलू को भी उठाया। कहा कि हर वर्ष किताबों में अनावश्यक बदलाव से बड़े पैमाने पर कागज की बर्बादी हो रही है, जो पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह है। आरोप लगाया कि संबंधित विभागों और नियामक संस्थाओं की निष्क्रियता के चलते निजी स्कूलों की मनमानी पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

विधायक प्रकाश ने 'भुजा उठाकर' लिया 'प्रण': शिक्षा को नहीं बननें देंगेव्यापार,सीएम को 'पत्र'उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासनादेश का पालन नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे को लेकर शांत नहीं बैठेंगे और बड़ा आंदोलन भी किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग किया कि प्रदेश में एक समान पाठ्यक्रम सख्ती से लागू किया जाए। सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी आधारित शिक्षा अनिवार्य हो। इसके अलावा उन्होंने पुस्तकों के मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण, प्रकाशकों की निगरानी, स्कूल बैग के वजन से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन और जनपद स्तर पर विशेष जांच समिति गठित करने की भी मांग की है, ताकि निजी विद्यालयों की फीस संरचना, कार्यप्रणाली और पुस्तक चयन की पारदर्शी जांच हो सके। फिलहाल विधायक के इस सख्त रुख ने जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है, अभिभावकों को अब उम्मीद है कि उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई होगी। निजी विद्यालयों की “मनमानी पर लगाम” लग सकेगी।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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