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बांदा सपा में गृहयुद्ध : पार्टी की स्थिति "कोमें" में पहुंची ? प्रदेश नेतृत्व खामोश !
उत्तर प्रदेश

बांदा सपा में गृहयुद्ध : पार्टी की स्थिति “कोमें” में पहुंची ? प्रदेश नेतृत्व खामोश !

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। समाजवादी पार्टी का जिला संगठन इन दिनों “अंदरूनी कलह और आपसी खुंदक” की वजह से हिलकर रह गया है। “संगठन की स्थिति कौमे में” पहुंच जानें सी हैं ! चार दिन पूर्व जिले के सपा जिलाध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा और सपा राष्ट्रीय छात्र सभा के सचिव एवं जिला मीडिया प्रभारी प्रमोद गुप्ता ने जिस तरह एक-दूसरे को पार्टी से निष्कासित कर दिया, उससे “संगठन दो हिस्सों में बंट” चुका है। इस विवाद ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में असमंजस पैदा कर दिया बल्कि “पार्टी के जनाधार पर भी बड़ा सवाल” खड़ा कर दिया है !

बांदा सपा में गृहयुद्ध : पार्टी की स्थिति "कोमें" में पहुंची ? प्रदेश नेतृत्व खामोश !

चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे टकराव पर पार्टी के “राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल तक ने चुप्पी” साध रखी है। जिले के बड़े नेता भी इस पर अपनी राय देने से बच रहे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि दोनों नेताओं की व्यक्तिगत खुंदक और “गैर-संवैधानिक कार्रवाई ने संगठन को जमीनी स्तर पर खोखला” कर दिया है। स्थानीय नेताओं का दावा है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब “पार्टी का जनाधार बसपा से भी नीचे खिसक” गया है !  कार्यकर्ता खुले तौर पर मान रहे हैं कि “संगठन बूथ स्तर पर बुरी तरह चरमरा” चुका है और भाजपा से टक्कर लेने की हालत में कहीं दिखाई नहीं दे रहा।

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सपा के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, इस “तकरार के पीछे धन वसूली का विवाद अहम वजह” है। आरोप है कि “संगठन में पद और पकड़ को लेकर गुपचुप वसूली का खेल” चल रहा था, जो अब “खुलकर सामने आ गया” है। जिले में जहां सपा का संगठन बिखरा हुआ है, वहीं “बबेरू विधानसभा सीट” पर पार्टी अब भी “भाजपा के सामने मजबूत खड़ी दिखती” है।

बांदा सपा में गृहयुद्ध : पार्टी की स्थिति "कोमें" में पहुंची ? प्रदेश नेतृत्व खामोश !

इसका श्रेय “विधायक विशम्भर यादव को दिया” जा रहा है, जिन्होंने “अपने कार्य और कार्यकर्ताओं” के बीच पकड़ से “जन-मन” में पहचान बनाई है। इस पूरे विवाद पर हमने “प्रदेश अध्यक्ष से चार दिन लगातार संपर्क” करने की कोशिश की, लेकिन उनका “फोन रिसीव नहीं” हुआ। उधर, जिलाध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव का एक-दूसरे को निष्कासन का ऐलान संगठन के लिए अब “राजनीतिक खाज” बन गया है। दोनों बड़े नेताओं द्वारा “वाकयुद्ध में असंसदीय शब्दों तक का इस्तेमाल” हो रहा है, जिसने “सपा की साख को गहरा झटका” दिया है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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