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सपा में 'वर्चस्व' युद्ध : जिलाध्यक्ष बनाम राष्ट्रीय सचिव, निष्कासन की 'जंग' से संगठन में 'भूचाल'
उत्तर प्रदेश

सपा में ‘वर्चस्व’ युद्ध: जिलाध्यक्ष बनाम राष्ट्रीय सचिव, निष्कासन की ‘जंग’ से संगठन में ‘भूचाल’

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। समाजवादी पार्टी में इस समय मानो महाभारत छिड़ा हुआ है। जिला संगठन की सियासत में वर्चस्व की भूख ने ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया है कि जिलाध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा और छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव व जिला मीडिया प्रभारी प्रमोद गुप्ता राजा आमने-सामने तलवारें खींचकर खड़े हो गए हैं।

सपा में 'वर्चस्व' युद्ध : जिलाध्यक्ष बनाम राष्ट्रीय सचिव, निष्कासन की 'जंग' से संगठन में 'भूचाल'

दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए पार्टी से निष्कासित करने के पत्र जारी कर दिए हैं। जहाँ जिलाध्यक्ष कुशवाहा ने प्रमोद गुप्ता को छह साल के लिए ‘बाहर का रास्ता’ दिखा दिया, वहीं गुप्ता ने पलटवार करते हुए जिलाध्यक्ष को बारह साल के लिए निष्कासित करने का पत्र जारी कर दिया।

सपा में 'वर्चस्व' युद्ध : जिलाध्यक्ष बनाम राष्ट्रीय सचिव, निष्कासन की 'जंग' से संगठन में 'भूचाल'

यह अभूतपूर्व स्थिति न केवल कार्यकर्ताओं को ‘हक्का-बक्का’ कर रही है बल्कि जिले की राजनीति में भी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। ‘दोनों नेताओं’ के बीच छिड़ी इस ‘जंग’ पर अन्य ‘राजनीतिक दल चटखारे’ ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनावों के पहले संगठन में मची यह ‘अंदरूनी कलह’ सपा की ‘रणनीति और जनाधार’ को ‘गहरी चोट’ पहुँचा सकती है।

सपा में 'वर्चस्व' युद्ध : जिलाध्यक्ष बनाम राष्ट्रीय सचिव, निष्कासन की 'जंग' से संगठन में 'भूचाल'

जिलाध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा ने कहा “मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की सहमति से प्रमोद गुप्ता को पार्टी से निष्कासित किया है। प्रमोद गुप्ता द्वारा जारी पत्र गैर-संवैधानिक और आधारहीन है। यह ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसी हरकत है। वहीं दूसरी ओर प्रमोद गुप्ता राजा का दावा है कि उन्होंने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति से ही जिलाध्यक्ष कुशवाहा को 12 वर्षों के लिए निष्कासित किया है।

सपा में 'वर्चस्व' युद्ध : जिलाध्यक्ष बनाम राष्ट्रीय सचिव, निष्कासन की 'जंग' से संगठन में 'भूचाल'

राष्ट्रीय सचिव व जिला मीडिया प्रभारी प्रमोद गुप्ता का कहना है कि, “संगठन में तानाशाही बर्दाश्त नहीं होगी”। मैं जिलाध्यक्ष को निष्कासित कर चुका हूँ। यह निर्णय पूरी तरह वैध और पार्टी संविधान के अनुरूप है। अब प्रश्न यह है कि असली निष्कासन किसका है ? दोनों नेताओं के परस्पर विरोधी दावों ने न केवल संगठन को उलझन में डाल दिया है बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा कर दी है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से अब तक कोई औपचारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे हालात और पेचीदा हो रहे हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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