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पंचायत अध्यक्ष सुनील द्वारा 18 करोड़ का टेंडर बना अवैधानिक ? सीडीओ को मिली जांच
उत्तर प्रदेश

पंचायत अध्यक्ष सुनील द्वारा 18 करोड़ का टेंडर बना अवैधानिक ? सीडीओ को मिली जांच

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिला पंचायत में 18 करोड़ के टेंडरों को अध्यक्ष सुनील पटेल द्वारा कथित कूटरचित ढंग से कराने का प्रयास हास्यास्पद हो गया है ? फिलहाल टेंडर प्रकाशन की वैधानिकता की जांच मुख्य विकास अधिकारी करेंगे। पंचायत एक्ट विधि विशेषज्ञों का मानना है की, 18 करोड़ का यह “टेंडर आदर्श नियम एवं विधि संगत संगत” नहीं हैं ! जो जिला पंचायत अध्यक्ष वित्तीय अनियमितता में शासन स्तर की जांच में दोषी हो और समयबद्धता के साथ कार्यवाई सुनिश्चित हो वह टेंडर प्रकाशित नहीं कर सकता ! दूसरा जांच का बिंदु यह भी महत्वपूर्ण है की बोर्ड के निर्माण समिति के अध्यक्ष सदाशिव अनुरागी से भी सलाह या पर्यवेक्षण नहीं लिया गया ! जबकि विवादित टेंडरों के संदर्भ में तो निर्माण समिति के अध्यक्ष की सलाह पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुये नैतिक रूप से लिया जाना चाहिये ! लेकिन प्रश्न उठ रहा है की जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील नें कूटरचित नीति से सलाह नहीं लिया ! आखिर क्यों ? 

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जिला पंचायत अधिनियम में, टेंडर प्रक्रिया के लिए विशिष्ट टेंडर से पहले निर्माण समिति के अध्यक्ष से सलाह या पर्यवेक्षण लिया जाना पारदर्शिता मना गया है। जिला पंचायतें आमतौर पर अपने सदस्यों, विशेष रूप से निर्माण समिति के अध्यक्ष को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करती हैं और उनकी सलाह लेती हैं। इसका कारण यह है कि निर्माण समिति के अध्यक्ष के पास उस क्षेत्र का विशेष ज्ञान और अनुभव होता है, और उनकी सलाह से टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। कुछ विवादित मामलों एवं विशिष्ट प्रकार के टेंडरों में, जिला पंचायत अधिनियम या अन्य नियमों के तहत निर्माण समिति के अध्यक्ष से सलाह लेना अनिवार्य है। वह यह सुनिश्चित करने के लिए कि टेंडर प्रक्रिया सही ढंग से की जा रही है इसलिये जिला पंचायत अध्यक्ष को विशेष रूप से निर्माण समिति के अध्यक्ष, को शामिल कर उनकी सलाह लेनी चाहिए ? पर ऐसा नहीं किया गया !

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जिला पंचायत के अधिकांश सदस्य पंचायत अध्यक्ष की कतिथ तानशाही एवं भ्रष्ट नीतियों के विरोध में “रुस्तमें जिला पंचायत” की भूमिका में हैं। मंडलायुक्त नें डीएम और उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। जो शीघ्र जांच आख्या प्रस्तुत करेगी। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील अपनें हर आरोपों का खंडन एवं अपने निर्णय को विधिसम्मत कहते हैं। फिलहाल शासन स्तर से भी रक्षाबंधन बाद तक इनके विरुद्ध हुई जांच जिसमें वह 6 करोड़ 21 लाख के वित्तीय अनियमितता में दोषी हैं के मामले का निर्णय आ जाने की पूरी संभावना बताई जा रही है। जन निगाहों को उत्सुकता से इस निर्णय का इंतजार हैं।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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