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बांदा के क्लीनिक बने 'मौत' के ठिकाने: गर्भपात और फर्जी अल्ट्रासाउंड का काला धंधा उजागर
उत्तर प्रदेश

बांदा के क्लीनिक बने मौत के ठिकाने: गर्भपात और फर्जी अल्ट्रासाउंड का काला धंधा उजागर

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिला मुख्यालय एक बार फिर अवैध और मानकविहीन चिकित्सा संस्थानों का ‘गढ़’ बनकर सामने आया है। गुरुवार को चित्रकूटधाम मंडल के अपर आयुक्त द्वितीय भगवान शरण और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेश मोहन गुप्ता की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में धड़ाधड़ छापेमारी की। आवास विकास कॉलोनी में स्थित चार प्रमुख क्लीनिकों पर की गई इस कार्रवाई ने अवैध संचालकों को न सिर्फ विभाग को हिलाकर रख दिया, बल्कि आम जनता के बीच भी स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत को उजागर कर दिया। कार्रवाई दोपहर 3 बजे शुरू हुई और देर शाम तक चली।

बांदा के क्लीनिक बने 'मौत' के ठिकाने: गर्भपात और फर्जी अल्ट्रासाउंड का काला धंधा उजागर

सबसे पहले रामा हेल्थ केयर क्लीनिक पर टीम पहुंची, जिसे डॉ. उमेश गुप्ता संचालित करते हैं। लेकिन वहां मरीजों को देखने का काम उनकी गैर-चिकित्सक पत्नी करती पाई गईं। पूछताछ में सामने आया कि यहां अवैध गर्भपात कराए जाते हैं। एलोपैथिक दवाएं तो बड़ी मात्रा में मिलीं, लेकिन होम्योपैथिक दवाएं मौजूद नहीं थीं। प्रसव और गर्भपात उपकरण भी बरामद हुए। सबसे गंभीर बात इस क्लीनिक का सीएमओ कार्यालय में कोई वैध पंजीकरण नहीं है। इसके बाद टीम बाबा बर्फानी डायग्नोस्टिक प्रा. लि. सेंटर पहुंची, जहां अल्ट्रासाउंड मशीन तो चालू थी, लेकिन कोई पंजीकृत चिकित्सक मौजूद नहीं था।

बांदा के क्लीनिक बने 'मौत' के ठिकाने: गर्भपात और फर्जी अल्ट्रासाउंड का काला धंधा उजागर

एक महिला की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भ्रूण की उम्र 31 सप्ताह पाई गई, लेकिन आधे घंटे इंतजार के बाद भी कोई डॉक्टर नहीं आया। भ्रूण लिंग परीक्षण से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड भी नहीं मिले। पटेल क्लीनिक, जिसे सिर्फ ओपीडी के लिए पंजीकृत किया गया है, वहां तीन मंजिला अवैध अस्पताल चल रहा था। जांच में 30 बेड और छह प्राइवेट रूम मिले। 40 मरीज भर्ती थे, जिनमें से ज़्यादातर को ऑक्सीजन और ड्रिप लगी थी। अग्निशमन विभाग की एनओसी भी नहीं मिली। बाला जी डायग्नोस्टिक सेंटर में एक सेवानिवृत्त डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करते पाए गए, जिनके पास पैथोलॉजी का प्रमाण पत्र है, लेकिन अल्ट्रासाउंड की वैधता नहीं। पंजीकरण किसी और डॉक्टर के नाम पर है, जो मौके पर मौजूद नहीं थे। जांच रिपोर्ट शासन को भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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