- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में मानसिक तनाव के रोगियों में वृद्धि हो रही हैं। इससे आत्महत्या की घटनायें भी बढ़ रही हैं। जिला अस्पताल में इस रोग से पीड़ितों के आने का ग्राफ बढ़ा है।

चिकित्सकों ने सावधान किया है की तनाव को अपने दिमाग में ज्यादा देर तक न ठहरने दें,वरना यह स्थायी रूप से अपनी जगह बना लेगा और मानसिक बीमारी में तब्दील होकर आत्महत्या के विचार पैदा करने लगेगा। खास बात यह कि मरीज को भी अपनी इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता। परिजनों को भी तब जानकारी होगी, जब इससे ग्रसित मरीज आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। इस तरह के मामले जिला अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओपीडी में आए दिन सामने आ रहे हैं।

जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के मनोवैज्ञानिक डाक्टर हरदयाल ने बताया कि अपने आसपास के किसी व्यक्ति की मनोस्थिति में बदलाव को हल्के में न लें। मसलन कोई व्यक्ति जो हमेशा खुश रहता था, लेकिन अचानक उसका मिजाज बदल जाए और बात-बात पर उसे गुस्सा आने लगे, हर समय तनाव में रहने लगे, तो समझ जाएं कि वह मानसिक बीमारी की चपेट में आ गया है। उसका इलाज कराएं। नियमित इलाज से वह पहले जैसा हो जाएगा। झाड़-फूंक के चक्कर में कतई न पड़ें। इलाज से इस बीमारी का आसानी से निदान हो जाता है।
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