- विनोद मिश्रा
बांदा। बिजली विभाग में इन दिनों घी के सुगंध की बहार है। “दसों उंगलियां घी से तर” हैं। लगभग चार सौ करोड़ का बजट मिलने से बांछें खिली हुई हैं। “कमाई के हिसाब का जोड़ -घटाव हो रहा है”।

दरअसल केंद्र सरकार की पुर्नोत्थान क्षेत्र सुधार योजना के तहत मंडल के शहर व गांवों में करीब 396 करोड़ की लागत से जर्जर लाइनों और ट्रांसफार्मरों का कायाकल्प का कार्य हो रहा है । चारों जिलों में एलटी लाइनों को हटाकर एबी कंडक्टर केबल डाले जा रहे हैं। जर्जर एचटी लाइनों को भी बदला जा रहा है। कृषि फीडरों को अलग करने के साथ ही अलग ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। यह सभी काम यूनीवर्सल कंपनी करा रही है।

मंडल के चारों जनपदों में यूनीवर्सल कंपनी नें शहर व गांवों में 396.07 करोड़ की लागत से 4714 किलोमीटर एलटी व एचटी जर्जर लाइनों को बदलने का काम कर रही है। फीडरों से बिजली का लोड कम करने के लिए नलकूपों से संबंधित कृषि फीडरों को घरेलू लाइनों से अलग किया जाएगा। 10 से 400 केवी तक के 2574 ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे।

इसके अलावा जिन ट्रांसफार्मरों पर अधिक लोड है, वहां पर अधिक क्षमता के ट्रांसफार्मर रखे जाएंगे या उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। 33 केवी से संबधित भी कई कार्य हो रहे हैं। ताकि लाइन लॉस को रोका जा सके और लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सके। विभागीय सूत्रों की माने तो कथित तौर पर इन सबमें महत्वपूर्ण बात यह है की कमाई का मार्जन का हिसाब लगाने में छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक मशगूल हैं। कमाई का अंदाजा लगाकर सभी खुशी में उंगलियां चटका रहें हैं।
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