- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में “गौवंशों को गौशालाओं में संरक्षित करने का शासकीय संकल्प धूल धूसरित” है ? इसके चलते किसानों की फसलें नष्ट हो रहीं हैं “किसान कंगाल हो गया” है। आवारा “गौवंश आफत का परकाला” बन चुके हैं ! जिला “प्रशासन की सारी कोशिशें गर्म तवे पर पानी की छींटों की तरह छन्न” हो गई हैं ! “अन्ना पशुओं पर कंट्रोल प्रशासन को आसमां से तारे तोड़ने जैसा है” !

ऐसा नहीं है की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल इस संदर्भ में गंभीर नहीं हैं। वह लगातार इस विषय पर परीक्षा दें रहीं हैं, यह बात अलग है की परिणाम अनुकूल नहीं आ रहे ? दरअसल होना यह चाहिये की सरकार खेतों की जाल घेरी के लिये लोहे के आठ फिटी ऐंगिल और जाली के लिये कम से कम 75 प्रतिशत अनुदान दे।इससे किसान अपने खेतों की मजबूत घेरा बाड़ी कर सकेंगे। उनके खेतों की फसलें बच सकेंगीं।

वैसे कुछ किसानों की तकलीफ फी जानें। बड़ोंखर ब्लाक के कनवारा बरुवा डेरा में किसानों नें अन्ना पशुओं के चलते खरीफ की फसलें हीं नहीं बोई। बदौसा के दुबरिया गांव में अन्ना गोवंश से किसान परेशान हैं। उन्हें खेतों में फसल चौपट होने का डर सता रहा है।गांव में बनी गोशाला खाली है। गोवंश अन्ना घूम रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला में करीब तीन सौ गोवंश थे, जो बाहर बाजार, बस्ती और खेतों में घूम रहे हैं। खेतों में रखवाली के लिए वहीं रहना पड़ता है। तीन साल पहले दस लाख रुपये की लागत से जिस उद्देश्य से गोशाला बनी थी, वह नजर नहीं आ रहा है।
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