- विनोद मिश्रा
बांदा। पाली हाउस और छोटे स्तर पर सब्जी की खेती से किसान अपनी किस्मत संवार सकते हैं। यह ऐसी विधि है, जिसमें किसान बे-मौसम सब्जियों की खेती कर सकते हैं। सीएफएलआई के सहयोग से बड़ोखर खुर्द गांव स्थित प्रेम सिंह की बगिया में महिला किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षक रोहित ने बताया कि टनल (सुरंग) में सब्जियां पैदा की जाती हैं।

लोहे या प्लास्टिक का स्टिक और पालीथिन शीट से छोटी व लंबी टनल बनाई जाती है। कम लागत में टनल को तैयार हो जाती है। इसकी मदद से फसल को ज्यादा गर्मी और सर्दी से बचाया जा सकता है। मौसम फसल के अनुकूल होने पर टनल को हटा दिया जाता है।कानपुर से आए प्रशिक्षक राम शर्मा व अमन सिंह ने हस्तचालित कृषि यंत्रों का खेत में उपयोग करके महिला किसानों को प्रशिक्षण दिया।

श्रमिक भारती के रावेंद्र द्विवेदी ने बताया कि एक बीघा में बेमौसमी सब्जियों के बेहन तैयार किया जाए तो ढ़ाई लाख सब्जी की पौध तैयार होगी। एक साल में छह से सात बार बेहन तैयार करके किसान आठ से दस लाख रुपये आमदनी कर सकते हैं। राजाभइया ने कहा कि एक बीघा में खीरा की खेती करेंगे तो करीब 20 हजार किग्रा उत्पादन होगा। 20 रुपये प्रति किग्रा की दर से भी बिक्री हुई तो चार लाख रुपये प्राप्त होंगे। यदि इसकी लागत एक लाख रुपये निकाल दें तो तीन लाख रुपये मुनाफा हो सकता है। कार्यक्रम का संचालन परियोजना समन्वयक इमरान अली ने किया।
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