- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले की 63 सहकारी समितियों में ताले लटक रहे हैं। नतीजतन डीएपी खाद के लाले हैं। बुवाई छोड़ किसान समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारी उन्हें वादों को भरोसा देकर टरका रहे हैं। परेशान किसानों को 10 दिनों से यही जवाब मिल रहा है कि रैक आने पर खाद मिलेगी।

किसानों ने किसी तरह धान की फसल तैयार की। अब गेहूं की बुवाई के समय डीएपी की किल्लत है। डीएपी को लेकर हाहाकार मचा है। 53 साधन सहकारी समितियों में ताले लटक गए हैं। जिले के करीब तीन लाख किसान डीएपी के लिए दर-दर की ठोकर रहे हैं। साधन सहकारी समितियों के अलावा यूपी एग्रो व पीसीएफ गोदामों में खाद नहीं ही मिल रही। समिति प्रभारियों का कहना है कि किसान भोर से ही कतारों में लग जाते हैं। अफसर तो दफ्तरों में बैठे मौज कर रहे हैं और उन्हें जवाब देना पड़ रहा है। डीएपी के लिए लौट रहे किसानों में आक्रोश है।

पचनेही से आए किसान सत्यदेव त्रिपाठी व मनसुख का कहना था कि खाद नहीं मिलनी तो अफसर साफ मना क्यों नहीं कर देेते? कल आएगी, परसों आएगी कहकर दस दिन से दौड़ाया जा रहा है। कामकाज का नुकसान अलग उठाना पड़ रहा है। लामा के हीरालाल, चुनबद्दी, रामऔतार और महोखर के सुंदरलाल, रामशरण आदि ने कहा कि खाद का संकट यहां के अफसरों की देन है।
इस साल रबी की फसल न बोई गई तो कर्ज कैसे चुकता होगा। पूरे साल परिवार के भरण पोषण में मुश्किलें आ जाएंगी। बांदा जिला कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि किसान सब्र रखें। डीएपी खाद मंगाई गई है। इन्हें सोसायटियों में भेजा जा तीन दिन के अंदर खाद आ जाएगी। इसे सीधे सोसायटी में भेजा जाएगा।
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