- विनोद मिश्रा
बांदा। उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड का बांदा जिला गरीबी के लिये भले ही अभिशाप बना हो, लेकिन यह खनन कारोबार से जुड़े माफियाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। नदियों का बेजा लाभ उठाते हुए कारोबारी पुलिस और प्रशासन के गठजोड़ से ‘लाल सोना’ यानी बालू लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

बुंदेलखंड का बांदा जिला अवैध खनन के दोहन से कराह रहा हैं, वहीं बालू खनन कारोबार से जुड़े लोग नदियों से ‘लाल सोना’ यानी ‘बालू’ लूट कर मालामाल हो रहे हैं। जिले की बालू खदानों ,खपटिहा क्षेत्र की खदान, अक्षरोंड़, मरौली खंड चार और छह, जौहरपुर, नरैनी क्षेत्र, सादी मदन पुर आदि अवैध खनन के लिये चर्चित हैं।ऐसा भी नहीं है कि बालू के अवैध खनन की जानकारी पुलिस और प्रशासन को नहीं है, लेकिन, मजबूत गठजोड़ और ऊंची पहुंच के चलते उनका धंधा बेखौफ चल रहा है?

मध्य प्रदेश की सरहद से शुरू होने वाली केन, बागै, यमुना नदी में यह गोरखधंधा कुछ ज्यादा ही चल रहा है। इन नदियों में करीब आधा दर्जन जगहों पर जलधारा तक बदल दी गई है और पोकलैंड व जेसीबी मशीनों के जरिए नदी की कोख खाली कर नदियों का चीर हरण हो रहा हैं।

हालांकि इतने के बाद भी खनिज विभाग के अधिकारी अवैध खनन को नकार रहे हैं। पता तो यहां तक चल रहा हैं कि कुछ मीडिया वाले अवैध खनन कराने के लिए बालू माफियाओं के दलाल बन उनके फेके टुकड़ों पर पल रहें हैं। ऐसे पत्राकारों से पत्राकारिता कलंकित हो तार-तार होकर जार-जार आंसू बहा रही हैं!
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