- विनोद मिश्रा
बांदा। मंडल में किसान साम्मान निधि अब भी केंद्र सरकार का चमत्कार नहीं बल्कि “लाली पाप” साबित हो रही है। यहां के काफी किसान सरकार की “कथनी और करनी” चमत्कार से परेशान हो अपना “सर ठोंकर” रहे हैं।
हकीकत के आईने में मंडल के 67,141 किसान अभी भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से वंचित हैं। आवेदन करने के डेढ़ से दो साल बाद भी योजना का पैसा इनके खाते में नहीं पहुंचा है। ऐसा तकनीकी और दस्तावेजी गड़बड़ियों की वजह से हो रहा है। संयुक्त कृषि निदेशक गड़बड़ियों को दूर करने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है।

कार्यालयों में किसानों को यह भी नहीं बताया जा रहा कि गड़बड़ी दूर करने का तरीका क्या है। किसानों का कहना है कि कोई तो ऐसी विधि निकले, जिससे उनकी निधि हासिल हो सके। मंडल में पांच लाख से अधिक ऐसे किसान हैं जिन्हें एक या दो किस्त ही हाथ लगी है। 3.22 लाख किसानों को ही नौ किस्तें मिल सकी हैं। इनकी 10वीं किस्त योजना में हुए संशोधन की वजह से फंस गई है।

योजना के तहत किसानों को छह हजार रुपये सालाना तीन किस्तों में दिए जा रहे हैं। विभागीय वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों को ही योजना का लाभ मिल रहा है। मंडल में ऐसे किसानों की बड़ी तादाद है जो अपना रजिस्ट्रेशन तो करा चुके हैं, लेकिन उनके खातों में किस्तें नहीं आ रही हैं। इसकी वजह आधार कार्ड, बैंक खाता में नाम का मिलान न होना बताया जा रहा है। इधर, योजना में हुए संशोधन की वजह से भी किसानों को परेशानी हो रही है। अब किसानों को 10वीं किस्त का लाभ लेने के लिए हलफनामा व राशन कार्ड भी विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कराना होगा।
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