
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिला मुख्यालय में “कानून की धज्जियां उड़ाते हुए करोड़ों का जुआ बेखौफ” चल रहा है। शहर के चर्चित ‘बरकत के जुआंड़ खाने’ में रात होते ही बावनपरी की फड़ सजती है और भोर तक ‘इक्का-बादशाह पर करोड़ों की नाल’ निकलती है। सबसे गंभीर बात, यह सब ‘पुलिस की नाक के नीचे’ हो रहा है।
आरोप है कि यह कारोबार सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है। आवास विकास से लेकर गन्छा, दुरेड़ी, कहला तक गांव-गांव फड़ें लगती हैं। सूत्रों के मुताबिक फड़ की सुरक्षा के लिए 15 बाउंसर तैनात रहते हैं। अंदर जाने के लिए “कोड वर्ड” चलता है। बड़े खिलाड़ियों के लिए “सुरा-सुंदरी” की भी व्यवस्था का आरोप है।
बताया जाता है कि “संचालक बरकत पर पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज” हैं और यह कारोबार पुलिस रिकॉर्ड में भी है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि “पैसे की चमक” के आगे कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है। ढर्रा 2-4 दिन बंद होता है, फिर दोगुनी रफ्तार से शुरू। जिले में लाखों-करोड़ों का लेनदेन हो रहा है, लेकिन मनी ट्रेल की कोई जांच नहीं।
आम जनता ने एसपी और डीएम से मांग की है कि बरकत के जुआंड़ खाने सहित पूरे नेटवर्क पर तुरंत छापेमारी हो, वित्तीय स्रोत और संरक्षण देने वालों की उच्चस्तरीय जांच हो और जुए में लिप्त पुलिसकर्मियों की भी जांच हो। अब देखना है कि प्रशासन इस “खुली चुनौती पर कब आंख खोलता” है। वरना “सवाल उठना लाजमी” है कि बांदा में कानून है या जुआ माफिया का राज ?
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