
- विनोद मिश्रा
बांदा। विद्युत चोरी रोकने के लिए जहां जगह-जगह स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू हो गया है, लेकिन मीटर लगाने को जिम्मेदार जीनियस पॉवर इंफ्रास्टक्चर लि. के कर्मचारी मानकों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। नियमानुसार स्मार्ट मीटर आर्म्ड केबल पर लगाए जाने चाहिए, लेकिन कंपनी के कर्मचारी धांधली करते हुए मीटरों को नार्मल विद्युत तार पर ही टांग कर रस्म अदायगी कर रहे हैं। एसडीओ विद्युत ने खुद मीटर लगाने के काम का निरीक्षण किया तो उन्हें खामियां देखने को मिली। जिस पर उन्होंने कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए उच्चाधिकारियों को पत्राचार करने की बात कही है।

प्रदेश में लगातार बढ़ रहे विद्युत चोरी के मामलों को रोकने के लिए सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने का प्रावधान किया है, जिसका ठेका जयपुर राजस्थान की जीनियस पॉवर इंफ्रास्टक्चर लिमिटेड को दिया गया है। बता दें कि काफी जद्दोजहद के बाद जब शहर के खाईपार मोहल्ले से स्मार्ट मीटर लगाने की शुरूआत की गई तो कंपनी के कर्मचारी ही मनमानी पर उतारू हो गए हैं। कंपनी के कर्मचारी मीटर लगाने के दौरान खुलेआम धांधली करते हुए मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। जिससे सरकार की मंशा पर तो पलीता लग ही रहा है, वहीं उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। देखा जाए तो स्मार्ट मीटर योजना बिजली विभाग का भला कर पाए या न कर पाए, लेकिन मीटर लगाने की ढुलमुल प्रक्रिया से कंपनी के साथ ही विभागीय अफसरों की कमाई का जरिया जरूर बनती जा रही है। सूत्रों की मानें तो स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर भोले भाले उपभोक्ताओं से अवैध वसूली भी की जा रही है, जिससे लोगों में सरकार की योजना के प्रति भ्रम फैल रहा है।

बताते हैं कि कंपनी के लोग घर पर स्मार्ट मीटर न लगाने के एवज में दो से तीन हजार रुपए तक वसूलते हैं। वहीं खंभे से विद्युत केबल जोड़ने के लिए भी दो से पांच सौ रुपए तक अवैध वसूली करते हैं। जबकि सरकार की मंशा यह है कि लोगों के घरों में आसानी से स्मार्ट मीटर लगाए जाएं और उन पर किसी भी प्रकार आर्थिक बोझ न पड़े। मोहल्ले वालों की मानें तो हाल ही में पीलीकोठी सबस्टेशन के एसडीओ चंदन यादव ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तो उन्हें भी खामियां देखने को मिली थी। जिस पर एसडीओ ने कंपनी के कर्मचारियों काे कड़ी फटकार भी लगाई थी, लेकिन कंपनी की कार्यशैली में कोई सुधार देखने को नहीं मिला। वह अपने ढर्रे पर ही काम कर रहे हैं। प्रकरण पर जब नोडल अधिकारी एई मीटर रवि गौतम से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मोबाइल तक रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।
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