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मौलाना नजीब-हबीब नें 'यूपी का पता' छिपाकर 'एमपी' में खरीदी जमीनें ? राजस्व अभिलेख बना 'सबूत' !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

मौलाना नजीब-हबीब नें ‘यूपी का पता’ छिपाकर ‘एमपी’ में खरीदी जमीनें ? राजस्व अभिलेख बना ‘सबूत’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जामिया अरबिया मदरसे के “मौलाना नजीब और हबीब” के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं ? दोनों भाइयों पर अपना उत्तर प्रदेश का मूल निवास छिपाकर मध्य प्रदेश में फर्जी पता दिखाकर जमीन खरीदने का गंभीर आरोप लगा है। राजस्व विभाग की खतौनियां इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा सबूत मानी जा रही हैं !

मौलाना नजीब-हबीब नें 'यूपी का पता' छिपाकर 'एमपी' में खरीदी जमीनें ? राजस्व अभिलेख बना 'सबूत' !राजस्व अभिलेखों के अनुसार मौलाना नजीब के नाम पन्ना मध्य प्रदेश की तहसील अजयगढ़ के ग्राम पिस्टा के खतौनी में खाता संख्या 461 में 0.8200 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदना दर्ज है। रजिस्ट्री में निवास का पता पन्ना (मध्य प्रदेश) अंकित है।

मौलाना नजीब-हबीब नें 'यूपी का पता' छिपाकर 'एमपी' में खरीदी जमीनें ? राजस्व अभिलेख बना 'सबूत' !वहीं नजीब के बड़े भाई हबीब अहमद पुत्र सिद्दीक अहमद के नाम तहसील अजयगढ़ के ग्राम बरौली में जमीन खरीदना दर्ज है ! खाता संख्या 82(5) में 0.4300 हेक्टेयर जमीन खरीदना अंकित है। इसमें भी जिला बांदा, यूपी का स्थायी पता छिपाकर उसी गांव बरौली को अपना निवास दिखाना दर्ज है! जबकि कानूनन दोनों का मूल निवास ग्राम हथौड़ा, जिला एवं तहसील बांदा, यूपी है।

माफिया मौलाना नजीब औऱ कुनबे नें कब्रिस्तान औऱ सरकारी जमीन भी हड़पी ? जागो सरकार, बुलडोजर का इंतजार ?इन कानूनी हालातों में जानबूझकर निवास छिपाना औऱ औऱ राजस्व दस्तावेजों में गलत दर्शाना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और दस्तावेजों में फर्जीवाड़े की श्रेणी में आता है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक इस कृत्य पर आईपीसी की धारा 420 धोखाधड़ी, धारा 467, मूल्यवान दस्तावेज में जालसाजी,धारा 468, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और धारा 471 जाली दस्तावेज का असली के रूप में प्रयोग के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। साथ ही भारतीय दंड संहिता और राजस्व संहिता के तहत गलत घोषणा कर संपत्ति खरीदना भी दंडनीय अपराध है।

मौलाना नजीब-हबीब नें 'यूपी का पता' छिपाकर 'एमपी' में खरीदी जमीनें ? राजस्व अभिलेख बना 'सबूत' !राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गैर-कृषक द्वारा या “फर्जी निवास” दिखाकर “जमीन खरीदने” पर वह “अमान्य घोषित” की जा सकती है और क्रेता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। अब इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक और पुलिस जांच की मांग उठ रही है। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से मूल निवास छिपाकर दूसरे राज्य में संपत्ति अर्जित कर सरकारी नियमों को धता बताया गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो दोनों मौलानाओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा और जमीन की कुर्की तक की कार्रवाई हो सकती है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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