- विनोद मिश्रा
बांदा । कॄषि विश्वविधालय नें तिलहन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की हैं। अलसी व तिल की तीन नई प्रजातियों को विकसित किया है। इससे बुंदेलखंड सहित मध्यप्रदेश का पठारी क्षेत्र तिलहन उत्पादन में समृद्ध होगा। बीयूएटी अलसी-चार का विमोचन हो गया है। वहीं तिल व अलसी की एक अन्य नई प्रजाति को विमोचन की मंजूरी मिल गई है।

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय शोध व कृषि के क्षेत्र में निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अलसी व तिल की तीन नई उन्नत प्रजातियों का विकास किया है। राज्य बीज विमोचन उपसमिति के 58वीं बैठक में अलसी की एलएमएस 2012-42 (बीयूएटी अलसी-3) व तिल की एमटी 2013-3 की प्रजातियों को विमोचन के लिए मंजूरी मिल गई है। वहीं केंद्रीय फसल मानक नॉटीफिकेशन व विमोचन उपसमिति की 85वीं बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा विकसित अलसी की एलएमएस 2015-31 (बीयूएटी अलसी-4) को विमोचित किया गया। यह प्रजातियां बुंदेलखंड व आस-पास के अन्य राज्यों के किसानों के लिए वरदान साबित होंगी। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वैज्ञानिकों की सराहना की है। कुलपति नें विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय के अधिकारियों व इन प्रजातियों की इजाद करने वाले वैज्ञानिक डॉ. वीपी नगाइच, डॉ. पीके सोनी, डॉ. एमएम तिवारी (स्व.), डॉ. एसी मिश्रा, डॉ. सीएम सिंह को बधाई दी। गौरतलब है कि बुंदेलखंड में पैदा होने वाली दलहन-तिलहन सहित खाद्यान्न वाली फसलों के लिए शोध किया जा रहा है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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