
- विनोद मिश्रा
बांदा। सावन की झमाझम बरसात में जहां लोग ‘घरों में पकौड़ियों का लुत्फ’ ले रहे हैं, वहीं शहर के ‘रेहड़ी-पटरी’ दुकानदार खुले आसमान के नीचे अपनी ‘रोजी-रोटी’ को भीगने से बचाने के लिए जूझ रहे हैं। ऐसे में पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अंकित बासू उनके लिए ‘बरसात में छत’ बनकर सामने आए हैं।
आमतौर पर नेता छाया देखते हैं, पर अंकित बासू ने “बरसात में भीगते और धूप में तपते” इन दुकानदारों का “दर्द” देखा। उन्होंने आज बाजारों में “घूम-घूम” कर दर्जनों दुकानदारों को मजबूत छाते वितरित किए। छाता मिलते ही एक दुकानदार बोला, “साहब, बरसात में हमारा सारा सामान भीग जाता था, अब इस छाते ने हमारी दुकानदारी बचा” ली।
राजनीतिक पंडित इसे महज ‘छाता वितरण नहीं, बल्कि बरसाती मौसम में भीगी हुई राजनीति’ को ‘मानवीय स्पर्श’ देने वाला कदम बता रहे हैं।
जहां नेता एसी कमरों से बरसात का नजारा देखते हैं, वहीं अंकित ने सड़क पर उतरकर भीगते हाथों को सहारा दिया। विरोधी भी कह रहे हैं कि कम उम्र में यह बड़ी राजनीतिक परिपक्वता है, जिसमें वोट का गणित नहीं, सेवा का भाव है।
अंकित बासू ने कहा कि यह अभियान ‘सावन’ भर जारी रहेगा। जब तक शहर का ‘अंतिम रेहड़ी-पटरी दुकानदार बरसात और धूप से सुरक्षित’ नहीं हो जाता, तब तक ‘हर जरूरतमंद तक छाता’ पहुंचाया जाएगा। बरसात के इस मौसम में ‘एक छाते ने सियासत को भी मानवीय’ बना दिया है।
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